BMC चुनाव पर MVA में महायुद्ध! उद्धव गुट ने कांग्रेस पर किया वार, राज ठाकरे को लेकर बढ़ी तकरार

BMC Election: शिवसेना (उबाठा) ने मुंबई निकाय चुनाव अकेले लड़ने के कांग्रेस के फैसले को विपक्षी एकता के लिए हानिकारक बताया है। मुखपत्र ‘सामना’ ने भाजपा पर मुंबई तोड़ने का आरोप लगाया।
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हर्षवर्धन सपकाल व उद्धव ठाकरे (डिजाइन फोटो)
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Shiv Sena UBT On Congress BMC Election Decision: महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (MVA) में दरारें दिखने लगी हैं। मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव में कांग्रेस के अकेले लड़ने की हालिया घोषणा पर शिवसेना (यूबीटी) ने मुखपत्र 'सामना' के जरिए तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिससे MVA नेताओं के बीच खींचतान बढ़ गई है।

शिवसेना (यूबीटी) ने मंगलवार को मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में सहयोगी कांग्रेस द्वारा मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा की कड़ी आलोचना की। संपादकीय में इस फैसले को विपक्षी एकता के लिए हानिकारक बताया गया है।

शिवसेना (यूबीटी) ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ‘मुंबई को अलग करने की योजना' को विफल करने के लिए संयुक्त चुनाव लड़ना महत्वपूर्ण है।

संपादकीय में दावा किया गया कि मुंबई न केवल महाराष्ट्र की राजधानी है, बल्कि देश की आर्थिक राजधानी भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ‘भाजपा प्रायोजित बिल्डर लॉबी’ मुंबई के प्रभाव को कम करने के लिए काम कर रही है।

ऐसे में, शिवसेना (यूबीटी) ने भाजपा और 'अदाणी संस्कृति' के खिलाफ लड़ने के लिए सभी विपक्षी दलों का एकजुट होना जरूरी बताया। संपादकीय में मराठी कांग्रेस के नेताओं को कम से कम यह समझने की अपील की गई कि यह लड़ाई "मुंबई और महाराष्ट्र के स्वाभिमान की है"।

राज ठाकरे के मुद्दे पर मतभेद

कांग्रेस ने हाल ही में घोषणा की थी कि वह बीएमसी चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी। शिवसेना (यूबीटी) ने सहयोगी कांग्रेस की इस चिंता को कम करके आंका कि अगर राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को विपक्षी गुट में शामिल किया जाता है, तो उसके उत्तर भारतीय और मुस्लिम मतदाता आधार में संभावित सेंध लग सकती है। संपादकीय में कहा गया है कि कांग्रेस का मानना ​​है कि अगर शिवसेना और मनसे एक साथ आती हैं, तो इससे हिंदी भाषी लोगों और मुस्लिम समुदाय के बीच उसकी संभावनाओं को नुकसान होगा। हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) ने तर्क दिया कि बिहार में न तो राज ठाकरे और न ही शिवसेना (यूबीटी) मौजूद थी, फिर भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।

मुस्लिम वोट रहेंगे साथ

शिवसेना (यूबीटी) को विश्वास है कि मुस्लिम वोट एमवीए के साथ रहेंगे। संपादकीय में कहा गया कि मुस्लिम समुदाय ने लोकसभा और राज्य विधानसभा दोनों चुनावों में महा विकास आघाडी (एमवीए) का समर्थन किया था। उद्धव ठाकरे ने कोरोना वायरस महामारी के दौरान धर्मों के बीच भेदभाव नहीं किया था। शिवसेना (यूबीटी) ने कांग्रेस को यह कहते हुए चिंता न करने की सलाह दी कि "मुसलमानों और उत्तर भारतीयों की चिंता नहीं करनी चाहिए, वे एमवीए का समर्थन करते रहेंगे"। शिवसेना (यूबीटी) ने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस सोचती है कि स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने से उसे हिंदी भाषी और मुस्लिमों के 100 प्रतिशत वोट मिल जाएंगे, तो ऐसा नहीं होगा।

उद्धव गुट का कांग्रेस पर तीखा तंज

संपादकीय में अपनी सहयोगी पार्टी पर तीखा तंज कसते हुए कहा गया कि कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व ने घोषणा की है कि वह मुंबई नगर निगम का चुनाव अकेले लड़ेगी। बिहार के नतीजों के बाद कांग्रेस पार्टी में जो आत्मविश्वास जगा है, वह काबिले तारीफ है। कांग्रेस एक स्वतंत्र पार्टी है।

शिवसेना (यूबीटी) ने राज ठाकरे का पुरजोर समर्थन किया और विपक्षी दलों द्वारा मुंबई में आयोजित एक मार्च में उनकी भागीदारी को याद किया। संपादकीय में कहा गया कि राज ठाकरे के आने से मराठी एकता और मजबूत होगी। इसके अलावा, शिवसेना (यूबीटी) ने सवाल किया कि क्या कांग्रेस बाकी 27 नगर निकायों में भी अकेले चुनाव लड़ेगी?

दो दिन पहले शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने संवाददाताओं से कहा था कि कांग्रेस एक स्वतंत्र पार्टी है, और मेरी भी। कांग्रेस अपना फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है, और मेरी पार्टी भी ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है"। हालांकि, दो दिन बाद प्रकाशित मुखपत्र का लहजा सुलह-समझौते वाला प्रतीत हुआ।

कांग्रेस ने किया पलटवार

कांग्रेस ने शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र पर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि अगर शिवसेना ने पहले अपना रुख स्पष्ट कर दिया होता, तो मौजूदा स्थिति से बचा जा सकता था। उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की पुरानी टिप्पणियों का परोक्ष रूप से जिक्र किया।

राउत ने पहले कहा था कि 'इंडी' गुट और एमवीए गुट केवल लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए बनाए गए थे, स्थानीय निकायों के चुनावी मुकाबले के लिए नहीं। सावंत ने कहा कि यह स्पष्ट होने से मदद मिलती कि ऐसी सलाह के लिए बाद में स्पष्टीकरण की आवश्यकता हो सकती है।

भाजपा बोली- पिछलग्गू राजनीति

इस बीच, सत्तारूढ़ भाजपा ने 'सामना' के संपादकीय को ‘पिछलग्गू राजनीति' का उदाहरण बताया। भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि पार्टी नेता (उद्धव ठाकरे) दावा करते हैं कि कांग्रेस स्वतंत्र है, लेकिन उनका मुखपत्र उसी कांग्रेस से अकेले चुनाव लड़ने के अपने रुख पर पुनर्विचार करने की अपील करता है। उन्होंने इसे दोहरे मापदंड और आत्मसम्मान की खोखली भावना बताया।

उपाध्याय ने आरोप लगाया कि जब शिवसेना (यूबीटी) भाजपा के साथ गठबंधन में थी, तो वह अक्सर सहयोगी पर हमला बोलती थी, लेकिन अब ‘सामना' के संपादकीय को पढ़ने से पता चलता है कि पार्टी किस तरह कांग्रेस के सामने नतमस्तक है। उन्होंने टिप्पणी की कि "एक बार जब आत्मसम्मान गिरवी रख दिया जाता है, तो ऐसी हताश अपीलें अपरिहार्य हो जाती हैं।

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