

BJP On Tipu Sultan Controversy: महाराष्ट्र में टीपू सुल्तान और छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता की तुलना को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक घमासान अब एक बड़े विवाद में तब्दील हो चुका है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के बयान ने राज्य की सियासत में आग लगा दी है, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने सीधे तौर पर उद्धव ठाकरे की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। भाजपा ने आरोप लगाया है कि सत्ता के मोह में उद्धव ठाकरे छत्रपति शिवाजी महाराज के अपमान पर भी मौन साधे हुए हैं।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब हर्षवर्धन सपकाल ने भाजपा को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्होंने कुछ भी ऐतिहासिक रूप से गलत कहा है, तो भाजपा उनकी जीभ काटने के लिए स्वतंत्र है। वहीं, शिवसेना (UBT) इस पूरे मामले में बीच का रास्ता अपनाती दिख रही है, जहाँ उन्होंने एक तरफ सपकाल के बयान को 'निंदनीय' बताया, तो दूसरी तरफ भाजपा पर ध्रुवीकरण का आरोप लगाया।
भाजपा प्रदेश मीडिया प्रमुख नवनाथ बन ने सोमवार को हमला तेज करते हुए कहा कि जो उद्धव ठाकरे हर छोटी बात पर फेसबुक लाइव करते हैं, वे शिवाजी महाराज के अपमान पर पिछले तीन दिनों से चुप क्यों हैं? भाजपा का आरोप है कि उद्धव ठाकरे को डर है कि यदि वे कांग्रेस के खिलाफ कुछ बोलेंगे, तो उनका दोबारा विधान परिषद सदस्य (MLC) बनने का सपना अधूरा रह जाएगा। भाजपा ने याद दिलाया कि जब महा विकास आघाडी सरकार में मंत्री असलम शेख ने एक पार्क का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखने की कोशिश की थी, तब भी भाजपा ने ही सड़कों पर उतरकर विरोध किया था।
टीपू सुल्तान विवाद में भाजपा के विरोध और कथित धमकियों पर पलटवार करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि वे भाजपा को बेनकाब करना बंद नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, "अगर मेरी जुबान काटनी है तो काट लो, लेकिन मैं अडानी-अंबानी के मुद्दों और संविधान बदलने की कोशिश करने वाली भाजपा से डरने वाला नहीं हूँ।" सपकाल का आरोप है कि भाजपा असली मुद्दों जैसे बेरोजगारी और महंगाई से जनता का ध्यान भटकाने के लिए टीपू सुल्तान के नाम पर राजनीति कर रही है और इसे जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दे रही है।
इस पूरे विवाद में उद्धव सेना (UBT) ने संतुलन बनाने की कोशिश की है। पार्टी ने सपकाल के बयान को अनावश्यक बताते हुए कहा कि उन्होंने भाजपा को बैठे-बिठाए एक मुद्दा दे दिया है। हालांकि, उद्धव सेना ने भाजपा पर भी तंज कसा कि अतीत में भाजपा नेताओं ने भी टीपू सुल्तान के प्रति सम्मान व्यक्त किया था। उन्होंने कहा कि भाजपा भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को अनुमति देती है, लेकिन यहाँ हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करती है। संजय राउत ने इसे चुनाव से पहले समाज में फूट डालने की भाजपा की "गंदी कोशिश" करार दिया है।