
एकनाथ शिंदे व शरद पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Shinde-Sharad Pawar Alliance In Yeola: महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को बड़ा राजनीतिक मोड़ देखने को मिला, जब नासिक जिले के येवला में सत्तारूढ़ महायुति के भीतर ही दरार खुलकर सामने आ गई। राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना ने नगर पालिका परिषद चुनाव में विपक्षी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया।
यह राजनीतिक समीकरण चौंकाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि महायुति सरकार में शिवसेना, भाजपा और अजित पवार की एनसीपी सहयोगी दल हैं, जबकि शरद पवार की एनसीपी विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाड़ी का हिस्सा है।
येवला राज्य सरकार में मंत्री और वरिष्ठ एनसीपी नेता छगन भुजबल का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता है। ऐसे में शिंदे की शिवसेना का विपक्षी खेमे के साथ गठजोड़ करना स्थानीय स्तर पर चुनावी गणित को पूरी तरह बदल सकता है। दोनों दलों के एक साथ आने से येवला नगर पालिका चुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की संभावना है।
इस नए गठबंधन का सीधा मुकाबला भाजपा और अजित पवार की एनसीपी से होगा। सीट बंटवारे के तहत नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद भाजपा-एनसीपी (अजित पवार) गठबंधन ने एनसीपी को दिया है।
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इसी क्रम में शुक्रवार को राजेंद्र लोनारी ने गठबंधन की ओर से अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया। नामांकन के दौरान भाजपा और एनसीपी (अजित पवार) के वरिष्ठ नेता मौजूद थे, जिसके बाद संयुक्त चुनाव प्रचार की औपचारिक शुरुआत भी हुई।
महाराष्ट्र में मौजूदा सत्ता गठबंधन महायुति में भाजपा, शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी शामिल हैं। दूसरी ओर, विपक्षी महा विकास आघाड़ी में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी), शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस शामिल हैं।
राज्य में 246 नगर पालिका परिषदों और 42 नगर पंचायतों के चुनाव 2 दिसंबर को होने हैं। येवला में उभरे इस अप्रत्याशित राजनीतिक समीकरण ने स्थानीय चुनावों का माहौल गर्मा दिया है और सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर असंतोष की नई चर्चाओं को हवा दे दी है।






