
शाइना एनसी (सौजन्य-एएनआई)
Shaina NC Navbharat Exclusive Interview: मुंबई महानगरपालिका सहित राज्य की 29 महापालिकाओं के चुनाव प्रचार मंगलवार की शाम 5 बजे के बाद थम जाएंगे। इससे पहले वोटरों का समर्थन जुटाने के लिए सभी उम्मीदवार धुआंधार प्रचार कर रहे हैं।
इस चुनावी गहमागहमी के बीच उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाइना एनसी अपने व्यस्त शेड्यूल के बाद भी संवाद के लिए नवभारत कार्यालय पहुंचीं, जहां उन्होंने चुनावी माहौल सहित तमाम सियासी मुद्दों पर बड़ी ही बेबाकी से अपना पक्ष रखा और सवालों का जवाब भी दिया। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश……….
चुनावी माहौल देखकर क्या लगता है, जनता का कैसा प्रतिसाद मिल रहा है?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे व शिवसेना ने ग्राउंड पर जो काम किया है, वह बेहतरीन रहा है। बहुत ही अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकती हूं कि मुंबई महानगरपालिका सहित राज्य की सभी 29 महापालिकाओं में महायुति को भारी जीत मिलेगी।
शीट शेयरिंग की बात करें तो बीएमसी में शिवसेना पहले हावी नजर आती थी, ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ती थी। लेकिन इस बार बीजेपी के साथ समझौता करना पड़ा। सीटें कम हो गई हैं।
कम सीटों पर लड़ने की बात करें तो विधानसभा चुनाव के दौरान 80 सीटों पर लड़ने के बाद भी डीसीएम शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के 60 विधायक निर्वाचित हुए थे। अर्थात हमने यह स्ट्राइक रेट अपने काम के आधार पर हासिल किया था। बीएमसी चुनाव में हम 90 सीटों पर लड़ रहे हैं और गर्व की बात यह है कि शिवसेना ने 63 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है। लाडली बहनों का आशीर्वाद एक बार फिर हमें मिलेगा।
……तो मेयर किस पार्टी का होगा?
मेयर महायुति का होगा। कोई मराठी ही होगा और एक ऐसा व्यक्ति, (महिला हो या पुरुष) मेयर बनेगा, जिसकी हर धड़कन प्रधान सेवक के रूप में मुंबई के लिए धड़केगी। जो प्रगति की राजनीति करे, लोगों को साथ रखे और बीएमसी के 70 हजार करोड़ रुपए जनता के हित में खर्च करने को प्राथमिकता दे।
लाडली बहन का कितना प्रभाव पड़ेगा?
निसंदेह लाभ होगा। क्योंकि यह कोई खैरात नहीं है। यह कम आमदनी वाले परिवार की महिलाओं को आर्थिक राहत उपलब्ध कराकर सशक्त बनाने के लिए दिया जा रहा सहयोग है। जब किसी जरूरतमंद महिला को 1500 रुपए मिलते हैं तो वह उसका उपयोग करके एक ट्यूशन क्लास, मेहंदी क्लास, घर से टिफिन जैसा को काम शुरू करके आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर सकती है।
हमने रविवार को ठाकरे बंधुओं की रैली देखी, उसमें उन्होंने आरोप -लगाया कि मुंबई को बीजेपी पूरी तरह – से अदानी को बेचने पर लगी है……
बहुत ही हास्यास्पद है। राज ठाकरे को पहले बताना चाहिए कि गौतम अदानी को गणपति में अपने घर आमंत्रित करते हैं। उनका परिवार अदानी के साथ फोटो खिंचवाता है और यहां टिप्पणी आलोचना !
महायुति सरकार में साथ होने के बाद भी अजीत पवार अलग चुनाव लड़ रहे हैं। क्या यह कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने की बीजेपी की कोई रणनीति है?
स्थानीय स्वराज संस्था के चुनावों को कार्यकर्ताओं का चुनाव कहा जाता है हर कार्यकर्ता की उम्मीद होती है कि उसे चुनाव लड़ने का मौका मिले। इसलिए इन चुनावों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार शीर्ष नेतृत्व निर्णय लेता है कि कहां गठबंधन करना है और कहां स्वबल पर लड़ना है। मुंबई, शिवसेना का गढ़ रही है।
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मुंबई में हिंदी बनाम मराठी विवाद पद क्या कहना चाहेंगी……
मुंबई किसी के बाप की जागीर नहीं है। ये किसी परिवार को नहीं दिया गया है। जो लोग, मराठी की बात करते हैं, वो यह नहीं बताते हैं कि बीते 25 वर्षों में मराठी अस्मिता, मराठी स्वाभिमान और मराठी भाषा के लिए क्या किया है? डीसीएम शिंदे के प्रयासों से मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा मिला। मिल मजदूर हों, रमाबाई नगर झोपड़पट्टी के 17 हजार निवासी हो, बीडीडी चॉल में स्थानीय लोगों को वापस लाना, आदि सब सक्रियता से होते हैं। भूमि पुत्र अमन शांति चाहते हैं। यहां मारना-पीटना, तोड़ फोड़, बंटेंगे, कटेंगे, फटेंगे, ये सब नहीं चलता है। युवा पीढ़ी को प्रगति चाहिए।






