एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे की मुलाकात से मचा सियासी हड़कंप, जानिए क्या है खास मीटिंग का मकसद
Raj Thackeray Eknath Shinde Meeting: महाराष्ट्र में राज ठाकरे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की। बीएमसी चुनाव के बाद हुई इस पहली मुलाकात ने नए राजनीतिक समीकरणों को हवा दी है।
- Written By: अनिल सिंह
Raj Thackeray Eknath Shinde Meeting (फोटो क्रेडिट-X)
MNS Shiv Sena Alliance: महाराष्ट्र की राजनीति में आज उस समय हलचल मच गई जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने अचानक राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके सरकारी निवास ‘नंदनवन’ में मुलाकात की। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव के नतीजों के बाद इन दोनों दिग्गज नेताओं की यह पहली मुलाकात है जिसने राज्य के सियासी गलियारों में कयासों का बाजार गर्म कर दिया है। हालांकि इस बैठक को औपचारिक बताया जा रहा है लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावी समीकरणों और भविष्य के गठबंधन की आहट के रूप में देख रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में चर्चा हुई जिसने विरोधियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे के बीच व्यक्तिगत संबंध हमेशा से मधुर रहे हैं और पिछले कुछ समय से हिंदुत्व के मुद्दे पर दोनों दलों के सुर भी मिलते नजर आए हैं। बैठक के बाद शिंदे खेमे और मनसे की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है लेकिन सूत्रों का दावा है कि चर्चा का मुख्य केंद्र मुंबई और ठाणे के विकास कार्यों के साथ-साथ राज्य की वर्तमान कानून व्यवस्था थी। बीएमसी चुनाव के बाद बदली हुई परिस्थितियों में राज ठाकरे का शिंदे के घर जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की सत्ता के नए केंद्र विकसित हो सकते हैं।
महायुति में मनसे की संभावित एंट्री पर चर्चा
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राज ठाकरे और एकनाथ शिंदे की इस मुलाकात के पीछे सबसे बड़ा कारण ‘महायुति’ गठबंधन का विस्तार हो सकता है। बीएमसी चुनाव में जिस तरह के परिणाम सामने आए हैं उसके बाद भाजपा और शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को एक ऐसे मजबूत साथी की तलाश है जो मराठी कार्ड खेल सके। राज ठाकरे इस खांचे में पूरी तरह फिट बैठते हैं और शिंदे के माध्यम से वे गठबंधन में अपनी भूमिका को और स्पष्ट करना चाहते हैं। यदि मनसे आधिकारिक रूप से गठबंधन में शामिल होती है तो यह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
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मुंबई और ठाणे के विकास कार्यों पर मंथन
बैठक के दौरान राज ठाकरे ने मुंबई और उपनगरों में चल रहे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने विशेष रूप से कोलाबा वॉकिंग प्लाजा और तटीय सड़क परियोजनाओं के क्रियान्वयन में स्थानीय नागरिकों को होने वाली असुविधाओं का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी एकनाथ शिंदे के पास उपमुख्यमंत्री के रूप में महत्वपूर्ण विभाग हैं इसलिए राज ठाकरे ने उनसे प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने का आग्रह किया है। यह चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज ठाकरे अक्सर सार्वजनिक मंचों से मुंबई के गिरते बुनियादी ढांचे पर सरकार को घेरते रहे हैं लेकिन इस बार उनका रुख सहयोगात्मक नजर आया।
मराठी मानुष और हिंदुत्व का साझा एजेंडा
इस मुलाकात का एक और महत्वपूर्ण पहलू हिंदुत्व और मराठी अस्मिता का साझा एजेंडा है। एकनाथ शिंदे जहां बालासाहेब ठाकरे की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करते हैं वहीं राज ठाकरे अपने आक्रामक मराठी एजेंडे के लिए जाने जाते हैं। दोनों नेताओं के एक साथ आने से विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (MVA) के वोट बैंक में सेंध लगने का खतरा बढ़ गया है। शिंदे और राज ठाकरे की यह केमिस्ट्री आने वाले विधानसभा चुनावों और अन्य स्थानीय निकाय चुनावों में गेमचेंजर साबित हो सकती है क्योंकि यह गठबंधन पारंपरिक शिवसैनिकों को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता रखता है। फिलहाल इस मुलाकात ने महाराष्ट्र की सत्ता के समीकरणों को एक नया मोड़ दे दिया है।
