मंत्री गणेश नाईक व विधायक मंदा म्हात्रे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Manda Mhatre Vs Ganesh Naik: नवी मुंबई मनपा चुनावों के बाद भाजपा के भीतर आंतरिक लड़ाई एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। बेलापुर की विधायक मंदा म्हात्रे ने मंत्री गणेश नाईक पर सीधा हमला बोला है। मनपा चुनावों में विधायक मंदा म्हात्रे के समर्थकों को टिकट नहीं दिया गया था। ठीक उसी तरह अब एक बार फिर से अनुमोदित नगरसेवकों की सूची में मंदा म्हात्रे के किसी भी समर्थक को जगह नहीं दी गई है, जिसकी वजह से मंदा म्हात्रे खासी नाराज हैं।
मंदा म्हात्रे ने भाजपा के शीर्ष नेताओं से मांग की थी कि अनुमोदित नगरसेवकों में उनके समर्थकों को भी शामिल किया जाए लेकिन अनुमोदित नगरसेवकों की जब सूची आई तो उसमें उनके एक भी समर्थक का नाम नहीं था। मंदा म्हात्रे ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि गणेश नाईक पहले भी शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को गुमराह कर चुके हैं और अब वे भाजपा को भी गुमराह करने का काम कर रहे हैं, मंदा म्हात्रे ने यह भी कहा कि गणेश नाईक बिना सत्ता के नहीं रह सकते हैं।
मंदा म्हात्रे ने यूबीटी नेता संजय राऊत के उस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसमें राऊत ने कहा था कि यदि उन्हें एकनाथ शिंदे के खिलाफ लड़ाई लड़नी है तो उन्हें घर वापसी करना चाहिए, मंदा म्हात्र ने कहा कि संजय राऊत गणेश नाईक के प्रवक्ता जैसे बात कर रहे है। संजय राऊत को चाहिए कि वे गणेश नाईक को जल्द से जल्द अपनी पार्टी में शामिल करा लें। उन्होंने कहा कि संजय राऊत बहुत बड़े नेता है। मेरा बोलना उचित नहीं है, लेकिन बोलना ही पड़ेगा। क्योंकि वे हर समय भारतीय जनता पार्टी की बात करते रहते हैं। भारतीय जनता पार्टी की बात करते समय उन्हें अतीत के बारे में भी सोचना चाहिए।
आज वे कहते हैं कि गणेश नाईक को हमारी पार्टी में शामिल होना चाहिए, लेकिन उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि शिवसेना के साथ पहला विश्वासघात किस ने किया था, तो वह गणेश नाईक ही थे, उन्होंने सारी नगरपालिकाएं छीन ली और मेरे बाद शरद पवार के साथ एनसीपी में आ गए और वहां भी शरद पवार जैसे नेता को गुमराह करने का काम किया। जब गणेश नाईक शिवसेना छोड़कर शरद पवार के पास आए। उन्होंने शरद पवार को घेर लिया और शरद पवार ने उन्हें सब कुछ दे दिया।
मैं इस बात की गवाह हूं कि जब उन्होंने शरद पवार से ठाणे जिले की मांग की थी। उस समय ठाणे जिले में एनसीपी नंबर एक पर थी। वसंत डावखरे, आरसी पाटिल, सुभाष भोईर, देवराम भोईर, एनसीपी के सभी बड़े-छोटे नेता और नवी मुंबई में मैं थी, उस समय उन्होंने शरद पवार से कहा था कि मैं पूरे ठाणे जिले का नेतृत्व करूंगा और शरद पवार ने इसके लिए हा भी कर दी थी। इसके बाद गणेश नाईक ने उनकी आंखों में धूल झोंकने का काम किया।
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उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ बयानबाजी को लेकर शिवसेना के नेताओं और वन मंत्री गणेश नाईक के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। शिंदे गुट के नेता व मंत्री संजय शिरसाट ने नाईक को चेतावनी दी है कि वे शिंदे के खिलाफ अपनी बयानबाजी रोके अन्यथा सड़क पर यह लड़ाई शुरू हो जाएगी। उन्होंने यदि संयम नहीं बरता तो करारा जवाब दिया जाएगा। शिरसाट ने कहा कि गणेश नाईक हमारे नेता एकनाथ शिंदे को टार्गेट कर विवादित बयान दे रहे हैं और आधारहीन आरोप लगा रहे हैं। इसकी कोई सीमा होती है। यदि शिवसैनिकों का धैर्य टूट गया तो वे सड़क पर उतर जाएंगे।
नवी मुंबई में एकनाथ शिंदे विरुद्ध गणेश नाईक पोस्टर वार शुरू गया है। कई इलाकों में शिंदे के समर्थन में पोस्टर लगाए गए। किसी का नाम लिए बिना, उस पर एक भड़काऊ टेक्स्ट लिखा है, जिसमें कहा गया है, रखुद को भूलने की बीमारी बताने वाले मूर्तिकारों का फ्री इलाज किया जाएगा। इसमें एकनाथ शिंदे व उनके पुत्र सांसद श्रीकांत शिंदे की तस्वीर थी। हालांकि मुंबई मनपा ने ये पोस्टर तुरंत हटा दिए, गणेश नाईक खुद को ‘नवी मुंबई का मूर्तिकार’ मानते हैं।