गणेशोत्सव में पर्यावरण संग तैयारी: प्लास्टिक बैन से माखरों और पूजा सामग्री की मांग में भारी उछाल

Mumbai News: गणेशोत्सव को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ गई है। प्लास्टिक प्रतिबंध के कारण इस वर्ष पर्यावरण अनुकूल माखरों, कृत्रिम फूलों और मंदिरों की सजावट की मांग में तेजी देखी जा रही है।
गणेशोत्सव में पूजा सामग्री की खरीदारी करते लोग (pic credit; social media)
गणेशोत्सव में पूजा सामग्री की खरीदारी करते लोग (pic credit; social media)
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Maharashtra News: इस बार गणेशोत्सव पहले से अधिक उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जाने वाला है। राज्य सरकार द्वारा इसे 'राज्य महोत्सव' का दर्जा दिए जाने के बाद बाजारों में रौनक और बढ़ गई है। भक्तगण घर और मंडपों में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की तैयारी में जुटे हैं।

प्लास्टिक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध का सीधा असर बाजारों में देखने को मिल रहा है। लोग इस बार पारंपरिक और पर्यावरण के अनुकूल माखरों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। कागज से बने विभिन्न आकार और रंगों के माखर ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। शाहू मिट्टी से बनी गणेश मूर्तियों की तरह अब पर्यावरण अनुकूल माखर भी खरीदारों की पहली पसंद बन चुके हैं।

बाजारों में खरीदारों की उमड़ी भीड़

मुंबई, ठाणे, कल्याण, भिवंडी, उल्हासनगर, नवी मुंबई, पनवेल और उरण के बाजारों में रविवार को भारी भीड़ उमड़ी। 3 फीट ऊँचे आकर्षक माखरों की कीमत 2,500 से 3,000 रुपये तक है। वहीं कृत्रिम फूलों की भी जबरदस्त मांग है। ये 250 रुपये से शुरू होकर अर्ध-गोलाकार फूलदान तक 2,000 रुपये में बिक रहे हैं।

मंदिरों की प्रतिकृतियों का क्रेज

बाजारों में इस बार मंदिरों की प्रतिकृतियाँ भी खूब पसंद की जा रही हैं। सिद्धिविनायक से लेकर तिरुपति बालाजी और आष्टविनायक मंदिरों तक की नकल वाले आकर्षक मंदिर उपलब्ध हैं। इनकी कीमत छोटी मूर्तियों के लिए 3,000 रुपये से शुरू होकर बड़े मंदिरों के लिए 15,000 से 16,000 रुपये तक पहुँच रही है।

पूजा सामग्री महँगी, लेकिन जोश बरकरार

इस बार अगरबत्ती, कपूर, दीपक और अन्य पूजा सामग्री की कीमतों में लगभग 20% वृद्धि दर्ज की गई है। मस्जिद बंदर और कालवा देवी बाजारों में विक्रेताओं का कहना है कि कच्चे माल की कीमत बढ़ने के कारण यह वृद्धि हुई है। इसके बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ है। गणेश भक्त सुगंधित अगरबत्तियाँ, सजावटी वस्त्र, मोतियों की मालाएँ और "गणपति बाप्पा मोरया" पट्टियाँ बड़ी संख्या में खरीद रहे हैं।

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