एफआईआर में नाम नहीं मतलब क्लीन चीट नहीं, पार्थ भूमि घोटाले पर सीएम का स्पष्ट रुख

Devendra Fadnavi: महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने पार्थ पवार भूमि घोटाले पर कहा कि एफआईआर में नाम न होना क्लीन चीट नहीं है, जांच में जो भी सामने आएगा उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल होगी।
एफआईआर में नाम नहीं मतलब क्लीन चीट नहीं
एफआईआर में नाम नहीं मतलब क्लीन चीट नहीं (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Pune Land Deal: उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के पुत्र पार्थ पवार के खिलाफ पुणे में जमीन खरीद मामले को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जांच में जिनका भी नाम आएगा, उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी, चाहे वह कोई भी हो। पार्थ पवार की ‘अमेडिया’ कंपनी पर पुणे के कोरेगांव पार्क क्षेत्र में 40 एकड़ जमीन खरीदने का आरोप है, जिस पर विपक्ष गंभीर सवाल उठा रहा है। मामले में एफआईआर दर्ज की गई है और जांच समिति गठित की गई है।

हालांकि इसके बाद अजीत पवार ने यह जमीन सौदा रद्द किए जाने की जानकारी दी थी। लेकिन पार्थ पवार के खिलाफ अब तक एफआईआर न दर्ज होने को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। एक साक्षात्कार में मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट कहा, “एफआईआर में नाम आने का यह मतलब नहीं कि वह व्यक्ति दोषी है। और नाम न आने का मतलब भी यह नहीं कि वह दोषी नहीं है। असली महत्व चार्जशीट का होता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि कानूनी प्रक्रिया का कड़ाई से पालन किया जाएगा और किसी को भी विशेष सुरक्षा नहीं मिलेगी। “कोई भी हो, बच नहीं पाएगा और किसी को बचाया नहीं जाएगा।”

विपक्ष का हमला जारी

विपक्ष का आरोप है कि पार्थ पवार के खिलाफ एफआईआर इसलिए नहीं हुई क्योंकि उनके पिता राज्य के उपमुख्यमंत्री हैं। इसी कारण एक महीने बाद भी यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। अब निगाहें पुलिस जांच और संभावित आरोपपत्र पर टिकी हैं।

उपमुख्यमंत्री से फिर मुख्यमंत्री-बदलाव आसान

साक्षात्कार के दौरान फडणवीस ने राजनीतिक बदलावों पर कहा कि उन्होंने कहा कि वे हर पद की जिम्मेदारी के साथ तुरंत तालमेल बैठा लेते हैं। “जिस दिन फिर से मुख्यमंत्री बना, उसी दिन सोच लिया कि अब पूरी जिम्मेदारी मेरी है और मैं काम में जुट गया।”

100 दिनों का रोडमैप तय

फडणवीस ने बताया कि अब सरकार ‘वार जोन’ से ‘पीस जोन’ में है और दीर्घकालीन लक्ष्यों पर काम कर रही है।उन्होंने कहा कि सभी विभागों को 100 दिनों के लक्ष्य दिए गए हैं। 15 अप्रैल तक लक्ष्य पूरा कर प्रगति सार्वजनिक करनी होगी। 10 हजार तहसीलदार कार्यालयों को 7 सूत्रीय कार्यक्रम लागू करने के निर्देश दिए। एक एजेंसी इनकी निष्पक्ष रेटिंग करेगी। 50 अंकों से कम वाले असफल माने जाएंगे। उन्होंने बताया कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और कृषि में AI के उपयोग पर भी तेजी से काम हो रहा है। मल्टी-मॉडल कॉरिडोर, शक्ति पीठ हाईवे, पुणे रिंग रोड, एयरपोर्ट और नदी जोड़ परियोजनाओं पर आर्थिक प्रबंधन और भूमि अधिग्रहण की समीक्षा की गई है।

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