पेपर लीक पर राजनीति छोड़ो, युवाओं का भविष्य बचाओ , संसद में श्रीकांत शिंदे का विपक्ष पर करारा हमला

Shrikant Shinde Statement: लोकसभा में पेपर लीक रोकने संबंधी संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार के सुझाव दिए।
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डॉ श्रीकांत शिंदे- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Paper Leak Bill: सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने संबंधी संशोधन विधेयक पर लोकसभा में चर्चा के दौरान शिवसेना संसदीय दल के नेता एवं कल्याण के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठा रही है, जबकि विपक्ष छात्रों के दर्द पर सिर्फ राजनीति कर रहा है।

"37 दिन जंतर-मंतर नहीं गए, अब युवाओं की बात कर रहे"

डॉ. शिंदे ने कहा कि आज जो लोग खुद को युवाओं का हितैषी बता रहे हैं, वे छात्र आंदोलन के समय 37 दिनों तक जंतर-मंतर तक नहीं पहुंचे। उन्हें डर था कि कहीं कोई नया राजनीतिक विकल्प न खड़ा हो जाए। अब जब जमीन खिसकती दिख रही है तो युवाओं के नाम पर राजनीति शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि छात्रों की भावनाओं को भड़काना, सरकार को गाली देना और भ्रम फैलाना समस्या का समाधान नहीं है। लोकतंत्र में सरकार ने छात्रों से संवाद किया, उनकी बात सुनी और कई मामलों में उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे भी वापस लिए। यही मोदी सरकार की संवेदनशीलता है।

सरकार ने सिस्टम साफ करने का काम किया

सांसद डॉ. शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सिर्फ पेपर लीक की निंदा नहीं की, बल्कि पूरे सिस्टम को साफ किया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। अब इस विधेयक के जरिए पेपर लीक के आरोपियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट से जल्द सजा दिलाने की व्यवस्था की जा रही है। "सरकार का उद्देश्य सिर्फ अपराधियों को जेल भेजना नहीं, बल्कि लाखों छात्रों का एक-एक साल बचाना ह

सांसद डॉ शिंदे का बड़ा सुझाव

शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर जोर देते हुए डॉ. शिंदे ने कहा कि किसी छात्र का भविष्य सिर्फ 3 घंटे की परीक्षा से तय नहीं होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा साल में एक से अधिक बार होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीमारी, पारिवारिक कारण या अन्य परिस्थितियों के चलते कई छात्र परीक्षा नहीं दे पाते, खासकर ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को दिक्कत होती है और उनका पूरा साल बर्बाद हो जाता है। कई देशों में ऐसी परीक्षाएं वर्ष में दो बार होती हैं। भारत में भी यह व्यवस्था लागू होने से छात्रों को दूसरा मौका मिलेगा और मानसिक दबाव भी कम होगा।

NEET व अन्य परीक्षाओं पर दिए जरूरी सुझाव

उन्होंने आगे कहा कि केवल NEET ही नहीं, अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी समय के अनुसार सुधार जरूरी हैं। इसके साथ ही प्रश्न बैंक प्रणाली विकसित करने, छात्रों पर मानसिक दबाव कम करने और कोचिंग उद्योग पर नियमन लगाने की जरूरत है।

शिवाजी महाराज से प्रेरणा लें युवा

डॉ. शिंदे ने युवाओं से कहा कि कोई भी परीक्षा जिंदगी तय नहीं करती। असफलता मिलने पर निराश न हों, बल्कि देश और परिवार के भविष्य के बारे में सोचें। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज का उदाहरण देते हुए कहा कि 16 साल की उम्र में उन्होंने पहला किला जीतकर हिंदवी स्वराज्य की नींव रखी। आज का युवा भी देश बदलने की ताकत रखता है, जरूरत है सही दिशा और मजबूत व्यवस्था की।

महाराष्ट्र सरकार की पहल

डॉ. शिंदे ने बताया कि महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर और EBC वर्ग की बेटियों के लिए मुफ्त शिक्षा की ऐतिहासिक पहल की है। सरकार सिर्फ कानून नहीं बना रही, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही है।उन्होंने कहा कि यह विधेयक सिर्फ पेपर लीक रोकने का कानून नहीं है, बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने का संकल्प है। विपक्ष को राजनीति छोड़कर युवाओं के साथ खड़ा होना चाहिए।