
नसीम खान (सौ. सोशल मीडिया )
Congress Leader Naseem Khan Exclusive Interview: मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनावों के प्रचार की गहमागहमी में नवभारत संवाददाता जितेंद्र मल्लाह ने कांग्रेस के कद्दावर उत्तर भारतीय नेता, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य एवं पूर्व मंत्री नसीम खान से मौजूदा चुनावी माहौल और संभावनाओं पर उनके विचार जाने। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश।
चुनाव प्रचार मंगलवार को समाप्त हो जाएगा। माहौल देखकर क्या लग रहा है?
बीएमसी चुनाव के लिए कांग्रेस, वंचित बहुजन आघाड़ी, आरपीआई (गवई गुट) सीपीआई, सीपीएम के साथ गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ रही है। हमारे उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार के लिए पूरी मुंबई में घूमने के दौरान मुझे लगा कि माहौल कांग्रेस के लिए सकारात्मक है। कांग्रेस के उम्मीदवारों का जनता का भरपूर स्नेह और समर्थन मिल रहा है। मुझे उम्मीद है कि मुंबई की जनता 15 जनवरी को कांग्रेस और उसके गठबंधन के प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करेगी।
ऐन बीएमसी चुनाव से पहले कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और शरद पवार की पार्टियों के साथ गठबंधन तोड़ दिया। इसका कितना लाभ या नुकसान होगा ?
देखिए कांग्रेस पार्टी अपनी विचारधारा और कैडर को मजबूत बनाने की नीति में विश्वास रखती है। खासकर लोकल बॉडी इलेक्शन में ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओं को अवसर देने की कांग्रेस की हमेशा से नीति रही है। पार्टी अपनी उस नीति और विचारधारा के साथ हमेशा मजबूती से खड़ रहती है।
इसी के अनुरूप मुंबई के नेताओं ने बीएमसी चुनाव के संदर्भ में निर्णय लिया है। 1999 से 2014 तक हम राकां के साथ राज्य की सत्ता में थे। लेकिन फिर भी स्थानीय निकायों के चुनाव खासकर मुंबई महानगरपालिका में हम अलग-अलग चुनाव लड़ते रहे हैं। इसलिए इसमें किसी और एंगल से देखने और सोचने की जरूरत नहीं है।
करीब डेढ़ दशक पहले तक हिंदी भाषी लोग कांग्रेस के परंपरागत वोटर हुआ करते थे। लेकिन अब ये कोर वोटर कांग्रेस से छिटक गया है। इसे फिर से अपने पाले में लाने के लिए आप क्या कर रहे हैं?
ये बात सच है। 2013-14 के बाद भारतीय जनता पार्टी ने देश में जिस तरह से ध्रुवीकरण की राजनीति शुरू की, उससे प्रभावित होकर कांग्रेस समर्थक कुछ उत्तर भारतीय वोटरों को बीजेपी अपने पाले में खींचने में सफल हुई है। लेकिन 2014 से 2026 तक के इनके कार्यकाल को देखकर एमएमआर के हिंदी भाषी, खासकर उत्तर भारतीय ये समझ चुके हैं कि बीजेपी सिर्फ वोट की राजनीति करती है। सत्ता में आने के बाद उसे हिंदी भाषियों और उनकी समस्याओं से कोई सरोकार नहीं होता है। हम लोगों से मिलकर उन्हें समझा रहे हैं कि भाषा, प्रांतवाद के खिलाफ लड़नेवाली असली पार्टी कांग्रेस ही है।
वंचितों को साथ में लेने के बाद भी कई सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार ही नहीं दे पाई……
हमने वंचित बहुजन आघाड़ी और समान विचारधारा वाले दूसरे दलों से गठबंधन किया है। लेकिन गठबंधन के निर्णय में देरी होने की वजह से हम कुछ सीटों पर उम्मीदवार नहीं दे पाए। फिर भी गठबंधन में लगभग 200 सीटों पर हम चुनाव लड़ रहे हैं। और सर्व समाज का हमें भारी समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस के समर्थन के बिना मुंबई का महापौर नहीं बनेगा।
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मराठी महापौर, मराठी हिंदू महापौर, बुर्के वाली महापौर को लेकर एक नया घमासान देखने को मिल रहा है….
कांग्रेस सर्व धर्म समभाव में विश्वास रखती है। देश के सभी प्रांतों में रहनेवाले और उनकी भाषाओं का सम्मान करती है। 1992 में कांग्रेस को मुंबई की जनता ने बीएमसी की सत्ता सौंपी थी। तब हमने दलित वर्ग से चंद्रकांत हंडोरे, उत्तर भारतीय आर आर सिंह, मराठी रा। ता। कदम और निर्मला सावंत प्रभावलकर को महापौर बनाया था।






