Mumbai Metro 11 Project ने पकड़ी रफ्तार, गेटवे ऑफ इंडिया से बांद्रा टर्मिनस तक शुरू हुआ मेगा सर्वे

Mumbai Metro 11 Project के तहत गेटवे ऑफ इंडिया से बांद्रा टर्मिनस तक भूमिगत कॉरिडोर के लिए सर्वे शुरू हो गया है। इस परियोजना से दक्षिण और पश्चिम मुंबई की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
Mumbai Metro AI Pantograph Monitoring System
मुंबई मेट्रो (सौ. सोशल मीडिया )
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Mumbai Metro 11 Project Underground Corridor: मुंबई को नया अंडरग्राउंड ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर देने की दिशा में मेट्रो-11 परियोजना ने रफ्तार पकड़ ली है। गेटवे ऑफ इंडिया से वडाला, धारावी होते हुए बांद्रा टर्मिनस तक प्रस्तावित भूमिगत मेट्रो कॉरिडोर के लिए मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने मेगा सर्वे की शुरुआत कर दी है।

पांच मीटर गहराई तक ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार तकनीक से भूमिगत पाइपलाइन, बिजली केबल, ड्रेनेज और अन्य बाधाओं की मैपिंग की जाएगी, ताकि निर्माण कार्य को तेज और सुरक्षित बनाया जा सके। करीब 6.9 किलोमीटर लंबे इस अंडरग्राउंड विस्तार से दक्षिण मुंबई, सेंट्रल मुंबई और पश्चिम उपनगर के बीच कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिलेगी।

एमएमआरसी के अनुसार यह विस्तार परियोजना इसी वर्ष मार्च में राज्य सरकार से मंजूरी मिलने के बाद तेज हुई है। बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने एमएमआरसी को निर्देश दिया था कि मेट्रो-11 कॉरिडोर को धारावी होते हुए बांद्रा टर्मिनस तक विस्तारित करे, ताकि मध्य मुंबई, दक्षिण मुंबई और पश्चिमी उपनगरों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत हो सके।

परिवहन नेटवर्क को जोड़ने वाला अहम लिंक

  • यह कॉरिडोर मुंबई के सबसे घनी आबादी वाले इलाकों में से एक धारावी से होकर गुजरेगा, इसे पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को जोड़ने वाला अहम लिंक माना जा रहा है।
  • मूल रूप से यह परियोजना वडाला, घाटकोपर, ठाणे और कासरवडवली को जोड़ने वाली मुंबई मेट्रो लाइन-4 के विस्तार के रूप में प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में इसे बांद्रा टर्मिनस तक सीधी कनेक्टिविटी देने के लिए पुनः डिजाइन किया गया। भविष्य में मेट्रो-11 नागपाड़ा और क्रॉफर्ड मार्केट होते हुए गेटवे ऑफ इंडिया तक पहुंचेगी, जिससे दक्षिण मुंबई तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और आसान हो जाएगी।

कई एजेंसियों से मिलेगा वित्तीय सहयोग

राज्य सरकार ने 2026-27 के बजट में मेट्रो-11 परियोजना के शुरुआती 16.5 किलोमीटर हिस्से की लागत 23,487 करोड़ रुपए आंकी है। बताया गया है कि परियोजना के लिए वितीय सहयोग कई एजेंसियों से मिलेगा। मुंबई मनपा 2,411 करोड़ रुपए देगी, जबकि मुंबई पोर्ट अथॉरिटी 804 करोड़ रुपए का योगदान करेगी।

केंद्र और राज्य सरकार क्रमश: 3,137 और 3,137 करोड़ रुपए साझा करेंगी, जबकि 12 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि संस्थागत कर्ज के माध्यम से जुटाई जाएगी। कोरोड़ों की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मुंबई की ट्रैफिक और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है।

1 महीने के भीतर अंतिम रिपोर्ट

मैपिंग के लिए नियुक्त की जाने वाली एजेंसी विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट, फोटोग्राफ और भूमिगत संरचनाओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगी। चयनित सलाहकार विभिन्न नागरिक निकायों और इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसियों के साथ समन्वय कर एक महीने के भीतर अंतिम रिपोर्ट सौंपेगा। सर्वे पूरा होने के बाद निर्माण कार्य की दिशा में अगला चरण शुरू होगा।

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