Mohol EVM case (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mohol EVM Case: मोहोल तालुका के कुरुल जिला परिषद क्षेत्र में शनिवार रात करीब 11 बजे एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। पुणे रोड पर स्थित एक ढाबे के पास दो ईवीएम और वीवीपैट मशीनें मिलीं। इस घटना से पूरे तालुका में हड़कंप मच गया और चुनाव प्रक्रिया की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे।
सूचना मिलते ही राकां (अजीत पवार गुट) के जिलाध्यक्ष और कुरुल जिला परिषद के प्रत्याशी उमेश पाटिल कार्यकर्ताओं के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के आने तक मतदान मशीनों को वहां से नहीं हटाया जाएगा। उनके इस रवैये से कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया।
पुलिस निरीक्षक हेमंत शेडगे, चुनाव अधिकारी सीमा होलकर, नायब तहसीलदार अनिल शहापुरे और सुधाकर धाईजे की टीम भी मौके पर पहुंची। पाटिल ने इसे लोकतंत्र का मजाक बताते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। नागरिकों और राजनीतिक दलों ने इस मामले की गहन जांच और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। सड़क किनारे मतदान मशीनें कैसे मिलीं, यह जांच का विषय बना हुआ है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि मिली हुई मशीनें रिजर्व मतदान यंत्र थीं, जिनका प्रत्यक्ष मतदान प्रक्रिया में उपयोग नहीं किया गया था। कुरुल (55) गट के कुछ मतदान केंद्रों के लिए नियुक्त क्षेत्रीय अधिकारियों के पास 02 कंट्रोल यूनिट और 02 बैलेट यूनिट समय पर सुरक्षा कक्ष में जमा नहीं कराई गई थीं।
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आयोग ने बताया कि 7 फरवरी को 220 मतदान केंद्रों पर मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हुआ और प्रत्यक्ष मतदान में कोई अनियमितता नहीं हुई। पंचनामा किए जाने के बाद मशीनों को सील कर सुरक्षा कक्ष में रख दिया गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि रिजर्व मशीनों को समय पर जमा न करने के मामले में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।