

Corruption in MBMC: मीरा-भाईंदर महानगरपालिका (MBMC) पर भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने का सनसनीखेज आरोप लगा है। सूचना के अधिकार (RTI) से खुलासा हुआ है कि एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 27 अफसरों की जांच की अनुमति मांगी थी लेकिन मनपा ने इन फाइलों को जानबूझकर सालों तक दबाकर रखा। हैरानी की बात है कि कानूनी समय-सीमा 90 दिन है, फिर भी कुछ फाइलें 1500 दिन तक अटकी रहीं।
जानकारी के मुताबिक MBMC ने पांच प्रस्ताव सीधे खारिज कर दिए और बाकी 22 प्रस्तावों को “प्रलंबित” बता दिया। इससे भ्रष्ट अफसर कार्रवाई से बचते रहे। RTI कार्यकर्ता एडवोकेट कृष्णा गुप्ता ने सितंबर 2023 से लगातार इस मामले का पीछा किया। उन्होंने मनपा आयुक्त और राज्य सरकार को 63 से ज्यादा बार लिखित शिकायत और रिमाइंडर भेजे।
गुप्ता ने तत्कालीन आयुक्त संजय श्रीपतराव काटकर से आस्थापन विभाग प्रमुख सुनील यादव पर भी कार्रवाई की मांग की थी। उनका आरोप है कि ये पूरा मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने की साजिश है।
लगातार दबाव के बाद मौजूदा आयुक्त एवं प्रशासक राधांविनोद शर्मा ने जांच पूरी कर 13 अफसरों को 'लिखित चेतावनी' जारी की। इनमें कई वरिष्ठ अभियंता और लिपिक भी शामिल हैं। लेकिन स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस कार्रवाई को मजाक बताया। उनका कहना है कि इतनी बड़ी लापरवाही और भ्रष्टाचार को छिपाने के बाद सिर्फ लिखित चेतावनी देना जनता के साथ धोखा है।
एड. कृष्णा गुप्ता का कहना है, "ये मामला साबित करता है कि भ्रष्ट अधिकारियों और उन्हें बचाने वाले सिस्टम की मिलीभगत लोकतंत्र के लिए खतरा है। लेकिन अगर नागरिक हिम्मत से आवाज उठाएं तो सिस्टम को जवाबदेह बनाया जा सकता है।"
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि सभी महानगरपालिकाओं में ACB के प्रस्तावों की डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली लागू की जाए, ताकि किसी भी जांच फाइल को 90 दिनों से ज्यादा दबाया न जा सके। साथ ही हर केस की स्थिति ऑनलाइन सार्वजनिक होनी चाहिए।
मीरा-भाईंदर का ये मामला सिर्फ एक शहर की कहानी नहीं है बल्कि पूरे राज्य की नगरपालिका व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। जहां भ्रष्टाचार निवारण कानून 90 दिन की सख्त समय-सीमा देता है, वहां फाइलें 1500 दिनों तक दबाकर रखी गईं और नतीजा निकला सिर्फ 'लिखित चेतावनी'।
स्थानीय नागरिक अब राज्य सरकार से स्वतंत्र जांच और दोषी अफसरों के निलंबन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर ऐसे मामलों में सिर्फ चेतावनी दी जाएगी तो भ्रष्टाचारियों के हौसले और बढ़ेंगे।