Rohit Pawar Rupali Chakankar (फोटो क्रेडिट-X)
Rohit Pawar On Women Commission: नासिक के अशोक खरात कांड ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है। ‘भोंदू बाबा’ को संरक्षण देने के आरोपों के चलते रूपाली चाकणकर के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की कमान किसके हाथों में होगी? इस बीच, शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार को टैग करते हुए चार दिग्गज और गैर-राजनीतिक महिलाओं के नाम सुझाकर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है।
रोहित पवार का मानना है कि महिला आयोग का अध्यक्ष कोई ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो केवल अपना प्रचार न करे, बल्कि जिसके पास कानूनी विशेषज्ञता और निष्पक्ष कार्यशैली हो।
रोहित पवार ने सोशल मीडिया के जरिए राज्य महिला आयोग के लिए चार ऐसी महिलाओं के नाम प्रस्तावित किए हैं जिनका करियर बेदाग और प्रभावशाली रहा है। इनमें सबसे प्रमुख नाम पूर्व आईपीएस अधिकारी मीरा बोरवंकर का है, जिन्हें उनकी निडरता के लिए जाना जाता है और कहा जाता है कि फिल्म ‘मर्दानी’ उन्हीं से प्रेरित है। इसके अलावा, सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय एडवोकेट वर्षा देशपांडे, ‘मासूम’ संस्था की मनीषा गुप्ते और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मेधा गाडगिल के नाम सुझाए गए हैं। पवार का तर्क है कि एक गैर-राजनीतिक व्यक्तित्व ही राज्य की पीड़ित महिलाओं को सच्चा न्याय दिला सकता है।
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अशोक खरात प्रकरण ने न केवल महिला आयोग बल्कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के भीतर भी दरारें पैदा कर दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, रूपाली चाकणकर को न केवल आयोग के पद से बल्कि एनसीपी महिला प्रदेश अध्यक्ष के पद से भी हटाने का भारी दबाव है। रोहित पवार ने सीधे तौर पर इस निर्णय की जिम्मेदारी सुनेत्रा पवार के कंधों पर डालते हुए कहा है कि यह सही चुनाव करने का समय है। आधी रात तक चली बैठकों के दौर से संकेत मिल रहे हैं कि संगठन में बड़े बदलाव जल्द ही देखने को मिल सकते हैं।
दूसरी ओर, पुलिस जांच में अशोक खरात की हैवानियत के नए सबूत सामने आ रहे हैं। 24 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेजे गए खरात के पास से पुलिस ने 58 आपत्तिजनक वीडियो बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल वह महिलाओं को ब्लैकमेल करने के लिए करता था। इसके अलावा, उसके पास से एक पिस्टल और जिंदा कारतूस भी मिले हैं। इस जघन्य मामले ने यह साफ कर दिया है कि महिला आयोग जैसी संस्थाओं में एक मजबूत और स्वतंत्र नेतृत्व की कितनी आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे अपराधियों को राजनीतिक ढाल न मिल सके।