स्याही कांड के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल, जानें विकास लवांडे और संग्रामबापू के विवाद की पूरी कहानी
Maharashtra Controversy: पुणे में विकास लवांडे पर हुए हमले के बाद रोहित पवार ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, वहीं नितेश राणे और उपमुख्यमंत्री शिंदे संग्रामबापू के समर्थन में उतरे।
- Written By: गोरक्ष पोफली
सांकेतिक फोटो (एआई फोटो)
Vikas Lawande Vs Sangram Bhandare: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता विकास लवांडे और वारकरी संप्रदाय से जुड़े संग्रामबापू भंडारे के बीच शुरू हुआ विवाद अब महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। ज्येष्ठ नेता शरद पवार के एक लेख से शुरू हुई यह चिंगारी अब पिस्तौल की धमकी और स्याही कांड तक पहुँच गई है, जिसमें राज्य के दिग्गज नेता आमने सामने आ गए हैं।
विवाद की जड़ 20 घुसपैठियों की सूची
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब विकास लवांडे ने वारकरी संप्रदाय के भीतर प्रतिगामी विचारधारा वाले 20 लोगों की एक सूची जारी की और उन्हें संप्रदाय में घुसपैठिया करार दिया। इस सूची में गोविंद देवगिरी महाराज, बंडातात्या कराडकर, तुषार भोसले और संग्रामबापू भंडारे जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। लवांडे का आरोप है कि ये लोग वारकरी संप्रदाय की मूल समतावादी विचारधारा को दूषित कर रहे हैं।
स्याही कांड और पिस्तौल का आरोप
इस सूची से आक्रोशित होकर संग्रामबापू भंडारे और उनके समर्थकों ने विकास लवांडे पर स्याही फेंकी। लवांडे का दावा है कि यह एक सुनियोजित हमला था और उन पर पिस्तौल तानकर जान से मारने की धमकी दी गई। इस घटना के बाद रोहित पवार ने लोणी कालभोर पुलिस स्टेशन का दौरा किया और पुलिस प्रशासन पर दबाव में काम करने का आरोप लगाया। रोहित पवार ने कहा, पुलिस आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज करने से इनकार कर रही है। अगर विकास लवांडे को खरोंच भी आई, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस और सरकार की होगी। उन्होंने यह भी कहा कि संत तुकाराम और छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में गलत बोलने वालों के खिलाफ अब संघर्ष का समय आ गया है।
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संग्रामबापू और सत्तापक्ष का पलटवार
दूसरी ओर, संग्रामबापू भंडारे ने पिस्तौल दिखाने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लवांडे की इतनी योग्यता नहीं है कि उन्हें रिवॉल्वर दिखाई जाए। संग्रामबापू ने कहा, जिन गुरुओं की छत्रछाया में हम पले बढ़े हैं, उनके खिलाफ अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम शिवाजी महाराज के मावले भी हैं और वारकरी भी।
संग्रामबापू के समर्थन में सत्तापक्ष के कई दिग्गज खुलकर मैदान में उतर आए हैं। मंत्री नितेश राणे ने पुणे में घोषणा की कि संग्रामबापू को कुछ नहीं होने दिया जाएगा और उन्होंने इस कदम की सराहना की। भाजपा विधायक महेश लांडगे और एनसीपी नेता संग्राम जगताप ने भी इसे स्वाभाविक आक्रोश बताया। सोशल मीडिया पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा संग्रामबापू से वीडियो कॉल पर बात करने का वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिससे इस विवाद ने पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले लिया है।
यह विवाद अब केवल दो व्यक्तियों के बीच नहीं रहा, बल्कि यह पुरोगामी बनाम प्रतिगामी विचारधारा की लड़ाई बन गया है। एक तरफ शरद पवार की पार्टी इसे संतों के विचारों की रक्षा बता रही है, तो दूसरी तरफ महायुति के नेता इसे हिंदू आस्था और गुरुओं के सम्मान की रक्षा करार दे रहे हैं।
