‘अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे’, अशोक खरात का शिर्डी जमीन धोखाधड़ी मामले में कबूलनामा
Ashok Kharat Case: महाराष्ट्र के चर्चित अशोक खरात मामले में शिर्डी जमीन धोखाधड़ी, अवैध सावकारी और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज हो गई है। एसआईटी और ईडी मामले से जुड़े आर्थिक लेन-देन की जांच कर रही हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
Ashok Kharat (सोर्सः सोशल मीडिया)
Shirdi Land Fraud: अवैध सावकारी और धोखाधड़ी के आरोपी अशोककुमार एकनाथ खरात ने शिर्डी के किसान रावसाहेब गोंदकर से जुड़े जमीन घोटाले में जमीन का लेन-देन होने की बात स्वीकार कर ली है। आरोपी ने शिर्डी पुलिस के समक्ष अपराध स्वीकार किया, जिसके बाद पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने पर शनिवार 9 मई को शिर्डी पुलिस ने उसे दोबारा नासिक की विशेष जांच टीम (एसआईटी) के हवाले कर दिया। शिर्डी पुलिस थाने के उपनिरीक्षक निवांत जाधव और उनकी टीम ने खरात से पूछताछ की।
इस दौरान खरात ने गोंदकर के साथ जमीन का सौदा होने की बात मानी, हालांकि उसने अतिरिक्त ब्याज वसूलने या इस संबंध में चर्चा करने से इनकार करते हुए खुद का बचाव करने का प्रयास किया। पीड़ित किसान रावसाहेब गोंदकर की शिकायत के अनुसार, खरात ने प्रतिमाह दो प्रतिशत ब्याज पर रकम देकर शिर्डी क्षेत्र की चार एकड़ जमीन अपने नाम पर करवा ली थी। शिकायत में कहा गया है कि पूरा पैसा ब्याज सहित लौटाने के बावजूद जमीन वापस नहीं की गई और उनके साथ धोखाधड़ी की गई।
मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध सावकारी की जांच तेज
इस बीच, अशोक खरात पिछले 52 दिनों से पुलिस हिरासत में है। नासिक में दर्ज नौ मामलों की जांच एसआईटी द्वारा पूरी किए जाने के बाद 4 मई को उसे शिर्डी के दसवें मामले में हिरासत में लिया गया था। अब इस मामले की प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद उसे फिर नासिक भेज दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी जल्द ही ग्यारहवें मामले में भी उसे गिरफ्तार कर सकती है।
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ऐसे में खरात की पुलिस हिरासत, अदालत और जेल के बीच आवाजाही अगले 20 से 25 दिनों तक जारी रहने की संभावना है। पूरे रैकेट में खरात की पत्नी कल्पना खरात को भी मुख्य आरोपी माना जा रहा है। पुलिस पिछले चार सप्ताह से उसकी तलाश में जुटी है, लेकिन वह अब तक फरार है। जांच में सामने आया है कि अशोक खरात, उसकी पत्नी कल्पना खरात, किरण नानासाहेब सोनवणे, अरविंद पांडुरंग बावके और अशोक परबत तांबे ने मिलकर अवैध सावकारी का जाल बिछाया था।
पर्दे के पीछे से एक बिल्डर
इस बीच, श्रद्धा और चमत्कार के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले स्वयंभू बाबा अशोक खरात द्वारा ओझर क्षेत्र में रियल एस्टेट कारोबार के जरिए काले धन को सफेद करने का मामला भी सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच में खुलासा हुआ है कि इन आर्थिक लेन-देन का मास्टरमाइंड ओझर का एक बड़ा बिल्डर है। बताया जा रहा है कि भक्तों से वसूली गई रकम को खपाने के लिए खरात ने एक डेवलपर्स कंपनी बनाई थी, जिसमें उसकी पत्नी और बेटी कागजी भागीदार थीं, जबकि पूरा संचालन पर्दे के पीछे से एक बिल्डर कर रहा था।
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अशोक खरात शिर्डी पुलिस की हिरासत में
ओझर में एक आलीशान टाउनशिप परियोजना के नाम पर करोड़ों रुपये के लेन-देन किए गए। ईडी द्वारा संबंधित बिल्डर के घर पर छापेमारी के दौरान 90 लाख रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और 60 लाख रुपये की फ्रीज नकदी मिलने से इस गठजोड़ की पुष्टि हुई है। जांच में एक सेवानिवृत्त आरटीओ अधिकारी का नाम भी सामने आया है, जिसने कथित रूप से अपनी पत्नी के नाम पर जमीन सौदों में भूमिका निभाई। सूत्रों के मुताबिक, सरकारी पद के प्रभाव और अनुभव का उपयोग कर जमीन हस्तांतरण और बेनामी सौदों को अंजाम दिया गया।
फिलहाल अशोक खरात शिर्डी पुलिस की हिरासत में है, लेकिन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उसे मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय प्रोडक्शन वारंट लेने की तैयारी कर रहा है। वहीं, एसआईटी भी उसके खिलाफ दर्ज प्रत्येक मामले की गहन जांच के लिए लगातार पुलिस हिरासत की मांग कर रही है।
