दावोस में गूंजा 'महाराष्ट्र मॉडल': 2030 तक 52% बिजली होगी सौर, मुंबई बनेगी देश की पहली 'सस्टेनेबल सिटी'

Mumbai : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दावोस में महाराष्ट्र के सौर ऊर्जा मॉडल और मुंबई की 'सर्कुलर इकोनॉमी' योजना को पेश किया। राज्य 2030 तक अपनी आधी से अधिक बिजली नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करेगा।
World Economic Forum Davos Devendra Fadnavis
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Mumbai Circular Economy: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (दावोस) में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र को वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन का अग्रणी चेहरा बताया है। उन्होंने किसानों के लिए एशिया के सबसे बड़े सौर बुनियादी ढांचे और मुंबई के लिए 'जीरो वेस्ट' विजन को साझा किया, जिसे अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केस स्टडी माना जाएगा।

ऊर्जा परिवर्तन का 'महाराष्ट्र मॉडल' अब वैश्विक पहचान बनेगा

दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ऊर्जा परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) पर केंद्रित एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र की बड़ी उपलब्धियों का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र ने एशिया का सबसे बड़ा वितरित सौर बुनियादी ढांचा (distributed solar infrastructure) विकसित किया है, जो सीधे तौर पर किसानों को 16,000 मेगावाट बिजली की आपूर्ति कर रहा है। इस मॉडल की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन ने इसे अन्य सदस्य देशों के लिए एक मार्गदर्शक 'केस स्टडी' के रूप में उपयोग करने का निर्णय लिया है, जो महाराष्ट्र और पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है।

पीएम कुसुम योजना में महाराष्ट्र नंबर-1 और 2030 का लक्ष्य

मुख्यमंत्री फडणवीस ने आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से बताया कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री कुसुम (KUSUM) योजना के तहत देश भर में जितने भी सौर पंप स्थापित किए गए हैं, उनमें से 60% अकेले महाराष्ट्र में हैं। इसी रिकॉर्ड प्रदर्शन की बदौलत महाराष्ट्र इस योजना में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, राज्य ने अब तक 4000 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स का काम भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए फडणवीस ने घोषणा की कि राज्य की नई 'रिसोर्स एडिक्वेसी प्लान' के तहत वर्ष 2030 तक महाराष्ट्र की कुल बिजली का 52% हिस्सा सौर और अन्य नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त होगा।

मुंबई के लिए 'सर्कुलर इकोनॉमी' का ऐतिहासिक ऐलान

पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास के तालमेल को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने मुंबई के भविष्य के लिए एक अभूतपूर्व 'सर्कुलर इकोनॉमी' (Circular Economy) विजन पेश किया। इस योजना के तहत देश की आर्थिक राजधानी को एक टिकाऊ शहर (Sustainable City) में बदला जाएगा।

सरकार का लक्ष्य है कि मुंबई में पैदा होने वाले कचरे का प्रबंधन पारंपरिक तरीके से न होकर आधुनिक तकनीक से किया जाए। इस नई रणनीति के अंतर्गत शहर में पानी, ठोस कचरा, औद्योगिक अपशिष्ट, इलेक्ट्रॉनिक कचरा और प्लास्टिक का 100% पुनर्चक्रण (recycling) सुनिश्चित किया जाएगा।

वायु और जल गुणवत्ता में सुधार पर विशेष जोर

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य मुंबई के नागरिकों के जीवन स्तर (Liveability) में सुधार करना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, शत-प्रतिशत रीसाइक्लिंग मॉडल लागू होने से मुंबई की हवा और पानी की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। यह कदम न केवल शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने में मदद करेगा, बल्कि इसे भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए एक लचीला और टिकाऊ महानगर भी बनाएगा। दावोस के मंच पर इन योजनाओं की प्रस्तुति ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को महाराष्ट्र की बदलती तस्वीर और सतत विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का स्पष्ट संदेश दिया है।

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