महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब एक क्लिक पर होगी उपलब्ध

Maharashtra Government ने मेडिको-लीगल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सीसीटीएनएस से जोड़ने का आदेश दिया। अब पुलिस को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सीधे रिपोर्ट की पहुंच मिलेगी।
devendra fadnavis
सीएम देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Medico-Legal Reporting Portal Integrated With Crime Tracking Network: महाराष्ट्र सरकार ने पूरे राज्य में मेडिको-लीगल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने बृहस्पतिवार को जारी एक सरकारी आदेश (जीआर) में एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच 'मेडलीपीआर' (MedLiPR) को पुलिस के सीसीटीएनएस डेटाबेस से एकीकृत करने का आदेश दिया है।

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य भर में 'मेडिको-लीगल' और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच पर रिपोर्टों को एकीकृत करने का आदेश दिया है। यह डिजिटल मंच, जिसे मेडिको लीगल एग्जामिनेशन एंड पोस्टमॉर्टम रिपोर्टिंग सिस्टम (मेडलीपीआर) कहा जाता है, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा विकसित किया गया है।

क्या मिलेगी सुविधा?

सरकारी आदेश (जीआर) के मुताबिक, मेडलीपीआर पोर्टल को अब पुलिस के अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीसीटीएनएस) डेटाबेस के साथ जोड़ा जाएगा। इस एकीकरण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच अधिकारी को चिकित्सा जांच करने वालों द्वारा तैयार किए गए कानूनी रूप से अहम चिकित्सा जांच के निष्कर्षों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक सीधी पहुंच प्राप्त हो सके।

अनिवार्य पंजीकरण और नोडल इकाइयां

इस डिजिटल प्रणाली के सुचारू और अनिवार्य कार्यान्वयन के लिए महाराष्ट्र सरकार ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी चिकित्सा महाविद्यालय और शहर के नगर निकाय अस्पताल जो मेडिको-लीगल मामलों को संभालते हैं, उन्हें मेडलीपीआर पोर्टल पर पंजीकरण कराना आवश्यक होगा। पंजीकरण के बाद, उन्हें सभी मेडिको-लीगल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बिना किसी चूक के पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी।

कार्यान्वयन की निगरानी और समन्वय के लिए एक संगठनात्मक ढांचा तैयार किया गया है

  • राज्य स्तरीय नोडल परीक्षक: मुंबई के एक मॉडल मेडिकल परीक्षक को राज्य स्तरीय नोडल परीक्षक नियुक्त किया गया है।
  • जिला स्तरीय नोडल परीक्षक: प्रत्येक जिले का अपना नोडल चिकित्सा परीक्षक होगा।
  • कार्यान्वयन नोडल इकाई: सभी चिकित्सा महाविद्यालय में फोरेंसिक मेडिसिन विभाग कार्यान्वयन के लिए नोडल इकाई के रूप में काम करेंगे।

यह कदम आपराधिक न्याय प्रणाली में पारदर्शिता और गति लाने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जिससे जांच प्रक्रियाओं में लगने वाले समय को कम किया जा सकेगा।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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