

Maharashtra Maternal Child Death News: मातृ व शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में बड़े स्तर पर प्रशासनिक 'सर्जिकल स्ट्राइक' करते हुए नई बहुस्तरीय जांच प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है।
इसके तहत अब राज्य में होने वाली प्रत्येक मातृ व शिशु मृत्यु की 'पोस्टमॉर्टम जैसी गहन जांच' की जाएगी। इसके लिए जिला, शहर, तालुका और वार्ड स्तर तक विशेष समितियों का गठन किया जा रहा है, जो प्रत्येक घटना के चिकित्सकीय, सामाजिक, प्रशासनिक और प्रणालीगत कारणों की जांच करेगी। इसके लिए जिला, तालुका, मनपा और राज्य स्तर तक विशेष जांच समितियों का गठन किया जा रहा है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार सचिव, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की अध्यक्षता में पहले से गठित राज्य स्तरीय कार्यदल अब हर 6 माह में बैठक कर मातृ व शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए रणनीति और नीतियां तय करेगा।
इन नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और हर मृत्यु की समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तरीय ग्रामीण और शहरी मातृ व शिशु मृत्यु अन्वेषण समितियों और तकनीकी अन्वेषण समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों की जिम्मेदारी मातृ मृत्यु के कम से कम 25 प्रतिशत और शिशु मृत्यु के 5 प्रतिशत मामलों की गहन जांच करनी होगी।
समितियां स्वास्थ्य सेवाओं में कमियों की पहचान करेंगी, इलाज में हुई देरी, रेफरल व्यवस्था की खामियां और सामाजिक कारणों का विश्लेषण कर निवारक उपाय सुझाएंगी। जिला स्तरीय तकनीकी समितियां प्रत्येक माह कम से कम 6 शिशु मृत्यु मामलों की विस्तृत जांच करेंगी। यदि किसी जिले में 6 से कम मामले होंगे तो सभी मामलों की जांच अनिवार्य होगी।
मुंबई से नवभारत लाइव के लिए धीरेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट