महाराष्ट्र में 21 अप्रैल से Government Employees की अनिश्चितकालीन हड़ताल, सरकार ने दी सख्त चेतावनी

महाराष्ट्र में 21 अप्रैल से Government Employees की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो रही है। 17 लाख कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हैं, जबकि सरकार ने हड़ताल को अवैध बताते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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देवेंद्र फडणवीस ने सरकारी कर्मचारियों को दिया अल्टीमेटम (सौ. सोशल मीडिया )
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Maharashtra Government Employees Strike: राज्य के सरकारी कर्मचारी संगठनों ने 21 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया है।

अपनी लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी अड़े हुए हैं, वहीं राज्य सरकार ने हड़ताल को अवैध घोषित करते हुए सख्त चेतावनी जारी की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि हड़ताल में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और हड़ताल अवधि का वेतन भी नहीं दिया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार, सभी विभाग प्रमुख और कार्यालय प्रमुख हड़ताल के दौरान मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे।

'मेस्मा' के अंतर्गत आने वाली सेवाओं के कर्मचारी यदि हड़ताल में शामिल होते हैं, तो उनके खिलाफ इसी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, हड़ताल जारी रहने तक किसी भी कर्मचारी को अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा।

17 लाख Government Employees हड़ताल के लिए अड़े

दूसरी ओर, राज्य के करीब 17 लाख सरकारी, अर्ध सरकारी कर्मचारी, शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी हड़ताल पर जाने के अपने निर्णय पर कायम हैं। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार ने कोई ठोस पहल नहीं की, जिसके कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। इस हड़ताल से मंत्रालय से लेकर तहसील स्तर तक सरकारी कामकाज प्रभावित होने की आशंका है।

3.5 लाख चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी शामिल

  • राज्य सरकार द्वारा 2024 में घोषित संशोधित राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली से संबंधित नियम और कार्यपद्धति की अधिसूचना दो वर्ष बीत जाने के बाद भी जारी नहीं की गई है।
  • कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष करना, संशोधित राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) से जुड़े नियमों की अधिसूचना जारी करना और रिक्त पदों पर भर्ती शामिल है।
  • वर्तमान में लगभग 35% पद खाली हैं, जबकि चतुर्थ श्रेणी और वाहन चालक पदों की भर्ती पर पूर्ण प्रतिबंध को भी कर्मचारी अव्यवहारिक बता रहे हैं।
  • इस आंदोलन में करीब 3.5 लाख चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी शामिल हो रहे हैं, जिससे सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों के कामकाज पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है।
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