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Mumbai: ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट पर नई एसओपी, 10% फेल नियम से बढ़ा विवाद
Driving License Test: महाराष्ट्र में ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट को लेकर नई SOP लागू होने से विवाद खड़ा हो गया है। 10% से कम फेल होने पर RTO अधिकारियों की समीक्षा होगी।
- Written By: अपूर्वा नायक

ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai News In Hindi: महाराष्ट्र परिवहन आयुक्त विवेक भीमनवार द्वारा जारी नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) ने ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
एसओपी के तहत यदि किसी आरटीओ में स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट में 10 प्रतिशत से कम अभ्यर्थी फेल होते हैं, तो वहां कार्यरत मोटर वाहन निरीक्षकों के काम की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही ड्राइविंग टेस्ट होने वाले ग्राउंड पर सीसीटीवी लगाना अनिवार्य किया गया है। परिवहन विभाग का कहना है कि यह कदम सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और कुशल ड्राइवर तैयार करने के लिए उठाया गया है।
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एसओपी में सभी आरटीओ को निर्देश दिए गए हैं कि ड्राइविंग टेस्ट केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत तय प्रक्रिया के अनुसार सख्ती से लिए जाएं। आयुक्त ने कहा है कि सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या ड्राइवरों की लापरवाही और गलत ड्राइविंग के कारण होती है। इसलिए लाइसेंस जारी करने से पहले वास्तविक ड्राइविंग कौशल की जांच जरूरी है।
विभाग का दावा है कि इस सख्ती से दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकेगी। हालांकि, 10 प्रतिशत फेल होने के मानक को लेकर मौजूदा और सेवानिवृत्त अधिकारियों ने सवाल खड़े किए हैं। कई अधिकारियों का कहना है कि यह निर्देश “अजीब” और “अनुचित” है।
एक समान व कड़े मैनुअल टेस्ट लागू करने के निर्देश
उनका तर्क है कि किसी निरीक्षक पर परोक्ष रूप से यह दबाव बन सकता है कि वह तय प्रतिशत में उम्मीदवारों को फेल करे, चाहे वे योग्य ही क्यों न हों। एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने कहा कि किसी को आंकड़ा पूरा करने के लिए फेल करना नियमों और नैतिकता के खिलाफ है।
मोटर वाहन निरीक्षकों का कहना है कि एसओपी में जिन नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है, कई आरटीओ में जरूरी बुनियादी ढांचा ही उपलब्ध नहीं है। राज्य के कई आरटीओ में ड्राइविंग टेस्ट के लिए छोटे मैदान हैं या फिर टेस्ट सार्वजनिक सड़कों पर कराए जाते हैं। कई जगहों पर पानी, शौचालय और छाया जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है।
ऐसे में नियमों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण टेस्ट लेना चुनौती बन जाता है। एसओपी में यह भी कहा गया है कि राज्य में आधुनिक ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक विकसित किए जा रहे हैं, जिससे टेस्ट प्रक्रिया मानकीकृत होगी।
इन ट्रैकों के पूरी तरह चालू होने में समय लगेगा, तब तक आरटीओ को एक समान और कड़े मैनुअल टेस्ट लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट सिस्टम, नामित IMV की मौजूदगी और ड्राइविंग टेस्ट स्थलों पर सीसीटीवी लगाने को अनिवार्य किया गया है।
सीसीटीवी की निगरानी आसान नहीं
सीसीटीवी को लेकर भी अधिकारियों ने व्यावहारिक दिक्कते बताई हैं। कई ग्रामीण इलाकों में टेस्ट खुले मैदान या अस्थायी कैंपों में होते हैं। ऐसे स्थानों पर सीसीटीवी लगाना और उनके संचालन की निगरानी करना आसान नहीं है।
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सवाल यह भी है कि इनके रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी होगी। आंकड़े बताते है कि समस्या गंभीर है, वर्ष 2019 से सितंबर 2025 के बीच महाराष्ट्र में 95,722 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई है। चालू वर्ष में 30 सितंबर तक 26,922 सड़क दुर्घटनाएं और 11,532 मौतें दर्ज की गई। पिछले साल की तुलना में दुर्घटनाओं में 0।8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि मौतों में 0।4 प्रतिशत की मामूली कमी आई है।
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