
सपा नेता अबू आजमी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Abu Azmi Allegations: महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनावों के नतीजों के बीच समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता अबू आजमी ने चुनावी प्रक्रिया पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने शिवाजीनगर में वोटरों के नाम गायब होने और मतदान के दौरान इस्तेमाल की गई स्याही की गुणवत्ता पर संदेह जताते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है।
महाराष्ट्र की सियासत में चुनावी नतीजों की हलचल के बीच समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी के एक बयान ने हड़कंप मचा दिया है। उन्होंने मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता से लेकर सत्ता पक्ष द्वारा पैसे के कथित दुरुपयोग तक, कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
मीडिया से बात करते हुए अबू आजमी ने दावा किया कि मुंबई के शिवाजीनगर इलाके में हजारों मतदाताओं को अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करने से वंचित रहना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब थे। इतना ही नहीं, उन्होंने चुनावी स्याही पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस बार इस्तेमाल की गई स्याही आसानी से मिट जा रही थी। आजमी के अनुसार, “अगर स्याही ही टिकाऊ नहीं है और लिस्ट से नाम गायब हैं, तो यह एक बड़ी गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।”
Mumbai, Maharashtra: Samajwadi Party State President Abu Azmi says, “Thousands of people in my Shivaji Nagar constituency were unable to vote because their names were not on the voter list. The ink used this year washes off immediately. So, there has been a lot of malpractice… pic.twitter.com/1ubFJxXINs — IANS (@ians_india) January 16, 2026
महायुति की जीत और चुनावी रुझानों पर कटाक्ष करते हुए सपा नेता ने कहा कि आज के दौर में निष्पक्ष चुनाव लड़ना लगभग असंभव हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में बैठे लोग भ्रष्टाचार के जरिए धन इकट्ठा करते हैं और चुनाव के वक्त उसे पानी की तरह बहाते हैं। उन्होंने कहा, “जिसके पास सत्ता है, उसके पास पैसा है। चोरी-छुपे पैसे बांटकर चुनाव जीते जा रहे हैं, जिससे एक ईमानदार उम्मीदवार के लिए राहें बंद हो गई हैं।”
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चुनाव नतीजों में AIMIM के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए आजमी ने एक विवादित बयान दिया। उन्होंने संकेत दिया कि जो भी दल परोक्ष रूप से भाजपा की मदद करता है या उनके साथ तालमेल बिठाता है, उसकी सीटों में इजाफा देखने को मिलता है।
अबू आजमी के इन बयानों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी शुचिता पर नई बहस छेड़ दी है। जहां विपक्ष इन आरोपों को लोकतंत्र की हत्या बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष ने इन दावों को हार की हताशा करार दिया है।






