महिला किसानों के बल पर टिकी है महाराष्ट्र की कृषि, सस्टेनेबल फार्मिंग पर चर्चा में बोले अपर मुख्य सचिव

Women Farmers: महाराष्ट्र की कृषि व्यवस्था में महिला किसानों की अहम भूमिका पर मुंबई में आयोजित चर्चा सत्र में सस्टेनेबल फार्मिंग, मिलेट्स और नीतिगत सुधारों पर मंथन किया गया।
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women farmers (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Maharashtra Agriculture: राज्य के अपर मुख्य सचिव (कृषि) विकास चंद्र रस्तोगी ने शुक्रवार को आयोजित एक चर्चा सत्र में कहा कि महाराष्ट्र की कृषि व्यवस्था महिला किसानों के महत्वपूर्ण योगदान पर आधारित है और उनके विकास के लिए राज्य सरकार लगातार विभिन्न योजनाएं लागू कर रही है। कृषि विभाग और एम. एस. स्वामिनाथन रिसर्च फाउंडेशन (MSSRF) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में “महिला किसानों को केंद्र में रखकर” सस्टेनेबल (टिकाऊ) कृषि और महिलाओं की भूमिका पर विस्तार से मंथन किया गया।

रस्तोगी ने बताया कि सतत कृषि, पोषण सुरक्षा और कृषि कार्यों में लैंगिक समानता को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एम. एस. स्वामिनाथन रिसर्च फाउंडेशन के साथ समझौता किया है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले वर्ष डॉ. एम. एस. स्वामिनाथन के जन्मदिवस को ‘शाश्वत कृषि दिवस’ के रूप में घोषित किया गया था। एमएसएसआरएफ की अध्यक्ष डॉ. सौम्या स्वामिनाथन ने कहा कि महिला किसानों की भूमिका को सशक्त बनाने के प्रयासों को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का पूरा समर्थन प्राप्त है।

महिला किसानों ने रखीं अपनी चुनौतियां

बीड, धाराशिव और पुणे के मावल क्षेत्र सहित विभिन्न जिलों से आईं महिला किसान द्वारका वाघमारे, वैशाली घुगे और शांताबाई वारवे ने दैनिक खेती में आने वाली चुनौतियों, पहचान की कमी, बाजार तक पहुंच और संसाधनों की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने सरकार से इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

पोषक अनाज (मिलेट्स) पर विशेष जोर

कार्यक्रम में बाजरा और रागी जैसे पोषक अनाज (मिलेट्स) के संवर्धन पर विशेष चर्चा की गई। एमएसएसआरएफ के डॉ. ई. डी. इस्रायल ऑलिव्हर किंग ने इन फसलों से जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। ओडिशा मिलेट मिशन के अनुभव साझा करते हुए यह बताया गया कि राज्य स्तर पर ऐसे अभियानों को सफलतापूर्वक कैसे लागू किया जा सकता है।

शोध और नीतिगत सुझावों पर मंथन

आईआईएमआर, हैदराबाद की डॉ. तारा सत्यवती और डॉ. पी. संजना रेड्डी ने बाजरा अनुसंधान और बेहतर किस्मों के विकास पर जानकारी दी। वहीं, आईसीआरआईएसएटी के डॉ. वेत्रिवेंद्रन मणी ने जैव विविधता संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। विधि केंद्रों और एमएसएसआरएफ के विशेषज्ञों ने क्षेत्रीय चुनौतियों और नीतिगत उपायों पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान महिला किसानों के लिए एक व्यापक डेटाबेस तैयार करने पर भी चर्चा हुई। उम्मीद जताई गई कि यह चर्चा सत्र महाराष्ट्र में महिला किसानों को सशक्त बनाने और पोषक अनाज आधारित टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

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