Bombay High Court: 757 ग्रामीण मराठी स्कूलों पर नहीं चलेगी सरकार की कैंची; एकतरफा कार्रवाई न्याय के खिलाफ
Maharashtra 757 School News Bombay High Court Decision: बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र के 757 स्कूलों को अपात्र घोषित करने के सरकारी फैसले पर रोक लगाई। स्कूलों को मिली बड़ी राहत।
- Written By: अनिल सिंह
757 स्कूलों को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत (फोटो क्रेडिट-X)
Bombay High Court on 757 Schools Grant: महाराष्ट्र सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने अप्रैल 2026 की शुरुआत में एक ऐसा कदम उठाया था, जिससे राज्य के सैकड़ों गैर-सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के अस्तित्व पर ही संकट मंडराने लगा था। 1 और 2 अप्रैल, 2026 को जारी किए गए दो अलग-अलग सरकारी प्रस्तावों के माध्यम से राज्य के 757 स्कूलों को वित्तीय अनुदान सूची से बाहर (अपात्र) कर दिया गया था। सरकार के इस अप्रत्याशित रुख के कारण स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया था। शिक्षक संघों ने आशंका जताई थी कि वित्तीय सहायता रुकने से ग्रामीण इलाकों के ये स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे, जिसके बाद इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई।
इस संवेदनशील मामले पर विस्तार से सुनवाई करते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय की कोल्हापुर बेंच के माननीय न्यायमूर्ति माधव जे. जामदार और न्यायमूर्ति प्रवीण एस. पाटिल की खंडपीठ ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। अदालत ने बेहद कड़े शब्दों में टिप्पणी की कि किसी भी संस्थान को अपना पक्ष रखने या स्पष्टीकरण देने का मौका दिए बिना सीधे अपात्र घोषित कर देना प्राकृतिक न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।
एक तरफ मराठी का प्रचार, दूसरी तरफ मराठी स्कूलों पर वार: हाई कोर्ट
सुनवाई के दौरान माननीय उच्च न्यायालय ने सरकार की दोहरी नीति पर भी तंज कसा। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि एक तरफ तो राज्य सरकार मराठी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बड़े-बड़े कदम उठाने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे प्रशासनिक निर्णय लिए जा रहे हैं जिससे ग्रामीण इलाकों के मराठी माध्यम के स्कूलों में भारी भ्रम और डर की स्थिति पैदा हो रही है। पीठ ने याद दिलाया कि इस तरह के फैसलों का सबसे सीधा और गंभीर असर ग्रामीण व पिछड़े क्षेत्रों के गरीब छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के भविष्य पर पड़ता है।
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अपात्र स्कूलों की सूची से तुरंत नाम हटाने का आदेश
अदालत ने प्रभावित स्कूलों के पक्ष में अंतरिम निर्देश जारी करते हुए कहा है कि याचिका दायर करने वाले सभी विद्यालयों के नाम अपात्रता की सूची से तुरंत प्रभाव से हटाए जाएं। जब तक शिक्षा विभाग इन सभी स्कूलों की व्यक्तिगत स्तर पर विधिवत सुनवाई पूरी नहीं कर लेता, तब तक ये सभी 757 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय पहले की तरह ही सामान्य रूप से काम करते रहेंगे। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक दंडात्मक कार्रवाई पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
स्कूल प्रबंधन और शिक्षक संगठनों ने जताई खुशी
बॉम्बे उच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक और राहत भरे फैसले का महाराष्ट्र के विभिन्न शिक्षक संघों, स्कूल प्रिंसिपलों और शिक्षाविदों ने खुले दिल से स्वागत किया है। प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि अदालत समय रहते हस्तक्षेप नहीं करती, तो दूर-दराज के गांवों में पढ़ रहे हजारों जरूरतमंद बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित हो जाते। अब सभी स्कूल प्रबंधन सरकार के समक्ष व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान अपना पूरा पक्ष और आवश्यक दस्तावेज मजबूती के साथ पेश करने की तैयारी में जुट गए हैं।
