
बंबई उच्च न्यायालय (सोर्स: सोशल मीडिया)
Kajal Gaur death case SIT Probe Demand: पालघर जिले के वसई की 13 वर्षीय छात्रा काजल गौड़ की दर्दनाक मौत ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर दिया है। मात्र 10 मिनट देर से स्कूल पहुंचने पर उसे 100 सिट-अप्स की सजा दी गई, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ती चली गई और अंततः जेजे अस्पताल में इलाज के दौरान 14 नवंबर को उसकी मौत हो गई। यह घटना गंभीर लापरवाही और शारीरिक सजा की अमानवीयता को उजागर करती है।
इस मामले में अब बॉम्बे हाई कोर्ट में एक पिटीशन दायर की गई है। वकील स्वप्ना प्रमोद कोडे ने चीफ जस्टिस चंद्रशेखर को संबोधित यह याचिका दायर कर कोर्ट से मामले में स्वयं संज्ञान लेने और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह सिर्फ एक बच्ची की मौत का मामला नहीं, बल्कि मानवता और संवैधानिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
याचिका में मांग की गई है कि स्कूल के संचालन, नियमों के उल्लंघन और इस घटना से संबंधित हर पहलू की पड़ताल के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई जाए। साथ ही स्कूल प्रबंधन और आरोपी टीचर ममता यादव के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने की अपील की गई है, ताकि जिम्मेदार व्यक्तियों को सजा मिल सके।
याचिका के अनुसार, 8 नवंबर 2025 को क्लास 6 की छात्रा काजल स्कूल 10 मिनट देर से पहुंची। आरोप है कि टीचर ने उसे 100 सिट-अप्स करने की कठोर सजा दी। घर लौटने के बाद काजल की तबीयत तेजी से बिगड़ी।
पहले उसे वसई के एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उसे जेजे हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहां 14 नवंबर को उसकी मौत हो गई।
वालिव पुलिस ने अब तक केवल एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि वे फॉरेंसिक रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्कूल की ओर से दावा किया गया है कि उन्हें काजल की खराब तबीयत के बारे में जानकारी थी और उन्होंने अभिभावकों को तुरंत मेडिकल मदद लेने की सलाह दी थी।
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टीचर ममता यादव के बारे में कहा गया कि वे समझ नहीं पाईं कि काजल सजा पाए छात्रों के समूह में शामिल है, क्योंकि उसकी हाइट बाकी बच्चों से कम थी। फिलहाल जांच पूरी होने तक टीचर को सस्पेंड कर दिया गया है।
पिटीशन में कहा गया है कि हर नागरिक को जीवन और गरिमा का अधिकार प्राप्त है। एक नाबालिग को ऐसी अमानवीय सजा देना न केवल कानून के खिलाफ है बल्कि यह एक गंभीर अपराध का संकेत देता है।
वकील स्वप्ना कोडे ने मांग की है कि स्कूल की मान्यता की जांच की जाए, शारीरिक सजा पर पूरे राज्य में कड़े निर्देश जारी हों और काजल के भाई व अन्य प्रभावित छात्रों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए।






