

Indian Army Impersonation Cyber Fraud Safety Tips: भारतीय सशस्त्र बलों के कर्मचारी बनकर लोगों से ठगी करने के मामले महाराष्ट्र समेत देशभर में तेजी से सामने आ रहे हैं। सेना के प्रति लोगों के सम्मान और भरोसे का फायदा उठाकर साइबर ठग खुद को आर्मी अधिकारी बताकर लोगों को विश्वास में लेते हैं और फिर जल्दबाजी या दबाव बनाकर आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं। हाल ही में मुंबई में साइबर ठगों ने खुद को भारतीय सेना का अधिकारी बताकर एक केमिकल सप्लाई कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर से करीब 21 लाख रुपये ठग लिए।
आरोपियों ने सेना के नाम पर बड़े ऑर्डर और खरीद प्रक्रिया का हवाला देकर विश्वास जीता और बाद में पैसे ऐंठ लिए। इस मामले में मुंबई साइबर पुलिस ने केस दर्ज किया। यह फ्रॉड मुंबई, पुणे और अन्य शहरों सहित देश के कई हिस्सों में देखा जा रहा है। ऐसे मामलों में ठग अक्सर वॉयस या वीडियो कॉल के जरिए संपर्क करते हैं और अपनी पहचान साबित करने के लिए फर्जी दस्तावेज, नकली आईडी कार्ड या अन्य जानकारी साझा करते हैं।
इस तरह के मामलों में ठग आम नागरिकों, छोटे कारोबारियों, मकान मालिकों, डॉक्टरों, ट्यूटर्स और ऑनलाइन सेवाएं देने वालों को निशाना बनाते हैं। वे खुद को सेना का जवान या अधिकारी बताकर सामान या सेवा खरीदने की बात करते हैं। ठग अक्सर आमने-सामने मिलने से बचने के लिए “आर्मी कैंप के नियम” या सुरक्षा कारणों का हवाला देते हैं।
भरोसा बनाने के लिए वे नकली पहचान पत्र और अन्य फर्जी दस्तावेज भी भेज सकते हैं। इसके बाद वे एडवांस पेमेंट या सरकारी मर्चेंट वॉलेट के नाम पर पीड़ित को एक पेमेंट रिक्वेस्ट या QR कोड भेजते हैं। यहां सबसे बड़ा खतरा यह होता है कि पैसे प्राप्त करने के लिए UPI पिन डालने के लिए कहा जाता है। जबकि वास्तविकता में UPI पिन डालने से पैसे खाते में आने के बजाय खाते से कट सकते हैं।
ठगी का एक दूसरा तरीका छोटे और मध्यम कारोबारियों को निशाना बनाना है। इसमें ठग खुद को सेना का अधिकारी बताकर बड़ी खरीदारी का ऑर्डर देने की बात करते हैं। इसके बाद वे सेना की खरीद प्रक्रिया या नियमों का हवाला देकर “मर्चेंट रजिस्ट्रेशन फीस”, “सिक्योरिटी डिपॉजिट” या अन्य शुल्क जमा करने के लिए कहते हैं। भुगतान मिलते ही वे संपर्क तोड़ देते हैं और कारोबारी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म भी ऐसे फ्रॉड को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं। फोनपे ने मिलिट्री इम्पर्सनेशन जैसे फ्रॉड से बचाव के लिए सुरक्षा सिस्टम विकसित किए हैं। कंपनी के अनुसार, उसका एआई आधारित सिक्योरिटी सिस्टम संदिग्ध गतिविधियों और जोखिम वाले नंबरों की पहचान करने में मदद करता है। यदि कोई ट्रांजेक्शन संदिग्ध पाया जाता है, तो यूजर को चेतावनी दी जाती है और भुगतान से पहले अतिरिक्त पुष्टि मांगी जाती है।
यदि आप या आपके आसपास कोई इस तरह की साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो समय गंवाए बिना तुरंत शिकायत करें। याद रखें, साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे (Golden Hours) बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। जितनी जल्दी आप शिकायत करेंगे, ठगों के खाते को फ्रीज कराने और पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।