मछुआरों पर संकट, रुकी नावें, बारिश ने उम्मीदों पर फेरा पानी, मुआवजे की उठी मांग

Mumbai News: मछुआरों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। तूफान और भारी बारिश के चलते ज़्यादातर मछुआरों को अपनी नावें किनारे पर लानी पड़ीं।
भारी बारिश से रुकी नावें (pic credit; social media)
भारी बारिश से रुकी नावें (pic credit; social media)
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Maharashtra News: समुद्र में मछली पकड़ने पर 1 जून से 31 जुलाई तक पाबंदी रहती है। उसके बाद का सीजन 1 अगस्त से शुरू होते ही मछुआरों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। तूफ़ान और भारी बारिश के चलते ज़्यादातर मछुआरों को अपनी नावें किनारे पर लानी पड़ीं। मौसम विभाग ने 16 से 21 अगस्त तक समुद्र में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और ऊंची लहरों की चेतावनी दी थी। इसी कारण लाल झंडा फहराकर मछुआरों से समुद्र में न जाने की अपील की गई।

बढ़ा आर्थिक बोझ

सीजन की शुरुआत में ही मछुआरों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। नाव की तैयारी, डीजल, बर्फ, जाल, किराना, मरम्मत और नाविकों के वेतन पर पहले ही लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं, मछली न मिलने से यह सारा खर्च बर्बाद हो गया। कई मछुआरे ने इन खर्चों के लिए निजी लोगों से ऊंचे व्याज पर क़र्ज़ भी लेते हैं, जिससे उन पर आर्थिक संकट और गहराता जा रहा है। इसे भी पढ़ें-मुंबई में मूसलधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात, मीठी नदी का पानी घरों में घुसा, 350 लोग रेस्क्यू

सरकार से राहत की उम्मीद

(मछुआरा, भूतोड़ी बंदर) मैक्सवेल कसुघर का कहना है कि उत्तन, चौक, पाली और भाईंदर के कोलीवाड़ा इलाकों में ज्यादातर नावें किनारे पर खड़ी हैं। मछुआरे मांग कर रहे हैं कि सरकार किसानों की तरह मछुआरों को भी आर्थिक मदद दे, ताकि सीजन की शुरुआत में हुए इस भारी नुकसान से वे उबर सकें। समुद्र हम पूरी तैयारी में सानी के कारण बिना मछली पकड़े लौटना पड़ा। डीजल, बर्फ और सामान पर खर्चा बर्बाद हो गया। नाविकों का वेतन भी देना है।

(मछुआरा) विलियम गोविंद का कहना है कि हर नाव पर 15-20 परिवार निर्भर रहते हैं। सीजन की शुरुआत में ही तूफान से भारी नुकसान हुआ है। सरकार को हमें मुआवजा देना चाहिए।

(मछुआरा) जॉर्जी गोविंद का कहना है कि +सरकार ने किसानों की तरह मछुआरों को भी मुआवजा देने का फैसला किया है, इसलिए इस तूफान से प्रभावित मछुआरों का पंचनामा कर उन्हें राहत दी जानी चाहिए।

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