MMR Petrol Diesel Requirement Explained (फोटो क्रेडिट-X)
MMR Petrol Diesel Requirement Explained: ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मचा दिया है। भारत, जो अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इस समय एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। समुद्री रास्तों में तनाव और तेलवाहक जहाजों के फंसने के कारण भारत में ईंधन की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। इसका सबसे सीधा असर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और उससे सटे ‘महामुंबई’ (MMR) क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ दिनों से मुंबई और उपनगरों में एलपीजी गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी हुई हैं, जिससे आम जनता के बीच ईंधन की खपत और उसकी उपलब्धता को लेकर उत्सुकता और चिंता दोनों बढ़ गई हैं।
महामुंबई यानी मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन (MMR) दुनिया के सबसे घने और सक्रिय क्षेत्रों में से एक है। यहाँ की करोड़ों की आबादी की गति को बनाए रखने के लिए हर दिन करोड़ों लीटर ईंधन की आवश्यकता होती है। जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति में बाधा आती है, तो इसका असर सीधे तौर पर यहाँ के रसद और परिवहन क्षेत्र पर पड़ता है। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर मुंबई जैसे विशाल महानगर को रोजाना कितने लीटर पेट्रोल, डीजल और गैस की जरूरत होती है और यहाँ का ईंधन नेटवर्क कैसे काम करता है।
मुंबई और उसके आसपास के शहरों की प्यास बुझाने के लिए हर दिन हजारों टैंकर सड़कों पर दौड़ते हैं। जानकारों के मुताबिक, महामुंबई की ईंधन जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न डिपो और रिफाइनरियों से रोजाना लगभग 2,000 से 2,500 ईंधन टैंकर निकलते हैं। ये टैंकर शहर और उपनगरों के 1,200 से अधिक पेट्रोल पंपों और 350 से ज्यादा सीएनजी स्टेशनों तक आपूर्ति पहुंचाते हैं। वर्तमान में जारी अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण इन टैंकरों की आवाजाही और रिफिलिंग पर दबाव बढ़ा है। वडाळा, माहुल और पनवेल जैसे क्षेत्रों में स्थित ऑयल टर्मिनल इस पूरी व्यवस्था की रीढ़ हैं।
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मुंबई ईंधन आपूर्ति केवल बाहर से नहीं आती, बल्कि यहाँ देश की सबसे महत्वपूर्ण रिफाइनरियां भी स्थित हैं। वडाळा ऑयल टर्मिनल देश के सबसे बड़े भंडारण केंद्रों में से एक है, जहाँ से पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) का वितरण होता है। जेएनपीटी (JNPT) लिक्विड कार्गो टर्मिनल आयातित पेट्रोलियम उत्पादों के लिए मुख्य द्वार है। इसके अलावा, माहुल में बीपीसीएल (BPCL) और एचपीसीएल (HPCL) की विशाल रिफाइनरियां स्थित हैं, जो न केवल मुंबई बल्कि पूरे पश्चिमी भारत के लिए ईंधन का उत्पादन करती हैं। ये रिफाइनरियां पाइपलाइनों के माध्यम से सीधे टर्मिनलों से जुड़ी हुई हैं।
गैस एजेंसियों के बाहर लग रही कतारों के बीच यह जानना जरूरी है कि मुंबई को एलपीजी की सप्लाई कहाँ से मिलती है। मुंबई और एमएमआर क्षेत्र के लिए पाँच प्रमुख टर्मिनल्स और डिपो काम करते हैं। ट्रॉम्बे ऑयल टर्मिनल से पाइपलाइन और टैंकरों के जरिए गैस वितरण होता है, जबकि उरण (Uran) एलपीजी टर्मिनल भंडारण और बड़े पैमाने पर वितरण का सबसे बड़ा केंद्र है। नवी मुंबई और रायगढ़ की जरूरतों को पनवेल पेट्रोलियम डिपो पूरा करता है। वहीं, भिवंडी का स्टोरेज हब वहां के विशाल लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक क्षेत्र के लिए डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
देश की आर्थिक राजधानी होने के नाते मुंबई में वाहनों की संख्या और औद्योगिक गतिविधियां चरम पर हैं। आंकड़ों के अनुसार, केवल मुंबई शहर और उपनगरों में प्रतिदिन 30 से 35 लाख लीटर पेट्रोल की खपत होती है। डीजल के मामले में यह आंकड़ा और भी बड़ा है, यहाँ रोजाना 50 से 55 लाख लीटर डीजल की आवश्यकता होती है। सार्वजनिक परिवहन और ऑटोरिक्शा के लिए यहाँ प्रतिदिन 25 से 30 लाख किलो सीएनजी का उपयोग किया जाता है। घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए एलपीजी की दैनिक मांग 1500 से 1800 टन के बीच रहती है।
मुंबई के दो सबसे महत्वपूर्ण सैटेलाइट शहर, ठाणे और नवी मुंबई भी ईंधन खपत में पीछे नहीं हैं। ठाणे में रोजाना 7 से 9 लाख लीटर पेट्रोल और 12 से 15 लाख लीटर डीजल की खपत होती है। नवी मुंबई में यह आंकड़ा 6 से 8 लाख लीटर पेट्रोल और 10 से 12 लाख लीटर डीजल है। सीएनजी के मामले में ठाणे में 5 से 6 लाख किलो और नवी मुंबई में 6 से 8 लाख किलो गैस की दैनिक खपत होती है। एलपीजी की मांग इन दोनों शहरों को मिलाकर लगभग 700 से 900 टन प्रतिदिन तक पहुंच जाती है, जो यहाँ की बढ़ती आबादी का संकेत है।
कल्याण-डोंबिवली का जुड़वां शहर हर दिन 6 से 7 लाख लीटर पेट्रोल और 10 से 12 लाख लीटर डीजल का उपयोग करता है। लेकिन सबसे दिलचस्प आंकड़े भिवंडी से आते हैं। भिवंडी को भारत का ‘लॉजिस्टिक्स हब’ कहा जाता है, इसलिए यहाँ पेट्रोल से ज्यादा डीजल की मांग है। भिवंडी में रोजाना 8 से 10 लाख लीटर डीजल की खपत होती है, जबकि पेट्रोल की मांग 3 से 4 लाख लीटर ही है। ट्रकों और मालवाहक जहाजों की आवाजाही के कारण यहाँ डीजल का महत्व बहुत अधिक है। यहाँ एलपीजी की दैनिक मांग भी 200 से 300 टन के करीब रहती है।
पनवेल और मीरा-भाईंदर जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में भी ईंधन की मांग तेजी से बढ़ी है। पनवेल में रोजाना 4 से 5 लाख लीटर पेट्रोल और 7 से 9 लाख लीटर डीजल खर्च होता है। मीरा-भाईंदर में यह खपत 3 से 4 लाख लीटर पेट्रोल और 5 से 6 लाख लीटर डीजल है। उल्हासनगर जैसे व्यापारिक केंद्र में प्रतिदिन 2 से 3 लाख लीटर पेट्रोल और 4 से 5 लाख लीटर डीजल की जरूरत होती है। इन सभी क्षेत्रों में सीएनजी और एलपीजी की मांग भी वैश्विक युद्ध की स्थिति के कारण प्रभावित हुई है, जिससे स्थानीय प्रशासन पर सुचारू वितरण का दबाव बढ़ गया है।
वैश्विक युद्ध की स्थितियों के बीच महामुंबई का यह ईंधन गणित स्पष्ट करता है कि आपूर्ति श्रृंखला में एक छोटा सा व्यवधान भी कितने बड़े संकट को जन्म दे सकता है। वर्तमान में प्रशासन भंडारण क्षमता बढ़ाने और वैकल्पिक मार्गों से आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है।