नाराज शिंदे फिर दिल्ली पहुंचे, महायुति में मनमुटाव की खाई और गहरी हुई
Eknath Shinde Delhi Visit: महाराष्ट्र महायुति में मतभेद गहराए। डीसीएम एकनाथ शिंदे कैबिनेट बहिष्कार के बाद अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे। स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर विवाद बढ़ा।
- Written By: आंचल लोखंडे
नाराज शिंदे फिर दिल्ली पहुंचे
Mumbai News: महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति में आंतरिक मतभेद और गहरा गया है। मंगलवार को उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के मंत्रियों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार की कैबिनेट बैठक का बहिष्कार किया था और इसे ठीक अगले दिन अर्थात मंगलवार को खुद डीसीएम शिंदे बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को अपनी व्यथा से अवगत कराने दिल्ली पहुंच गए। बताया जा रहा है कि दिल्ली में शिंदे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की।
इस दौरान उन्होंने स्थानीय निकाय चुनावों की पृष्ठभूमि में महायुति में उत्पन्न हुई कलह की वजहों से शाह को अवगत कराया। इसके अलावा बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और राकां अजीत पवार के नेतृत्व वाली महायुति सरकार 2।0 के पिछले 11 महीनों के कार्यकाल के दौरान पेश आई आंतरिक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। सूत्रों का दावा है कि डीसीएम शिंदे की दिल्ली में अमित शाह के अलावा भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात करने की योजना है।
महायुति में असंतोष बढ़ा…
स्थानीय निकाय चुनावों में सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन को लेकर महायुति में असंतोष बढ़ता दिख रहा है। स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच महायुति में शुरू हुआ विवाद अब गंभीर रूप लेता दिख रहा है। बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक से शिवसेना (शिंदे गुट) के सभी मंत्रियों ने बैठक से किनारा करके गठबंधन में दरार के संकेत दिए थे। इस असामान्य घटना के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने सभी मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और अपनी नाराजगी साफ शब्दों में व्यक्त की।
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दोष शिवसेना पर ही मढ़ दिया
डीसीएम शिंदे की शिवसेना की सबसे बड़ी नाराजगी बीजेपी के ऑपरेशन लोटस को लेकर है। जिसके तहत बड़ी संख्या में शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल किया जा रहा है। लेकिन दावा किया जा रहा है कि सीएम देवेंद्र ने इस प्रथा को शुरू करने का दोष शिवसेना पर ही मढ़ दिया। इसलिए नाराज होकर शिंदे मंगलवार को दिल्ली पहुंच गए। अटकलें लगाई जा रही हैं कि अपने दौरे को सामान्य घटना दिखाने के लिए शिंदे, दिल्ली से बिहार जा सकते हैं। बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान एनडीए के उम्मीदवारों के प्रचार के लिए उन्होंने बिहार में दो दो जनसभाएं की थीं। अब वे एनडीए की जीत के लिए बधाई देने के बहाने बिहार जा सकते हैं।
देवेंद्र-अजीत ने की आपातकालीन बैठक
दूसरी तरफ डीसीएम शिंदे के दिल्ली रवाना होने की खबर मिलते ही मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बीच वर्षा निवास में तत्काल बैठक बुलाई गई। इस बैठक में शिवसेना के मंत्रियों और एकनाथ शिंदे की बढ़ती नाराजगी को कैसे दूर किया जाए, इस पर गहन विचार-विमर्श हुआ। सूत्रों का दावा है कि बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि अगर शिंदे की नाराजगी और बढ़ती है तो आगे क्या रणनीति अपनाई जाए? यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि महायुति के तीनों घटक दलों (भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्ती (अजीत पवार) के बीच मनमुटाव की खाई और गहरी हो गई है।
मंत्री सरनाईक ने की थी पुष्टि
महायुति में डीसीएम शिंदे के नाराजगी की अटकलों की पुष्टि करते हुए उनकी पार्टी के नेता एवं परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने मंगलवार को कहा था कि परिवार में छोटे-मोटे मतभेद होते ही रहते हैं। पार्टी प्रवेश और चुनावी तैयारियों के दौरान कुछ मुद्दों पर असहमति थी, जिसे मुख्यमंत्री के सामने रखा गया था। सरनाईक ने आगे कहा कि तीनों पक्षों ने यह तय किया है कि महायुति के नेता, विधायक या पार्षद एक-दूसरे की पार्टी में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने दावा किया कि इस निर्णय को तुरंत अमल में लाया जाएगा। इसके साथ-साथ उन्होंने स्थिति को सामान्य बताते हुए कहा कि हमारे बीच कोई नाराजगी नहीं है।
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शिंदे को भी खा जाएगी बीजेपी
महायुति में डीसीएम शिंदे की शिवसेना की नाराजगी महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है। विपक्ष इस स्थिति का पूरा लाभ उठाने की कोशिश में जुटा है। कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मंगलवार को डीसीएम शिंदे को आगाह करते हुए कहा कि शिवसेना और राकां की तर्ज पर शिवसेना (शिंदे गुट) को भी बीजेपी खा जाएगी। इसलिए उन्हें समय रहते सतर्क हो जाना चाहिए तथा सरकार से बाहर निकल जाना चाहिए। सपकाल ने कहा कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अब महायुति में अकेले पड़ गए हैं और अपनी पार्टी के टूटने की चिंता उन्हें सता रही है। इसी वजह से सरकार नाराजगी की नौटंकी हो रही है।
