पॉलिटिकल सर्जरी में पिता से भी आगे निकले श्रीकांत शिंदे, ‘ऑपरेशन टाइगर’ के असली मास्टरमाइंड का हुआ खुलासा
Dr Shrikant Shinde Mastermind Operation Tiger Shiv Sena: शिवसेना UBT में हुई बड़ी 'सर्जरी' के पीछे मुख्यमंत्री के बेटे डॉ. श्रीकांत शिंदे का था दिमाग; दिल्ली से मुंबई तक की पूरी कहानी।
- Written By: अनिल सिंह
श्रीकांत शिंदे ऑपरेशन टाइगर के असली मास्टर माइंड (फोटो क्रेडिट-X)
Shrikant Shinde Mastermind Operation Tiger: महाराष्ट्र की राजनीति को पूरी तरह हिलाकर रख देने वाले ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 6 लोकसभा सांसदों को तोड़कर उद्धव ठाकरे को 2022 के बाद सबसे बड़ा झटका देने के इस पूरे मिशन की कमान किसी और ने नहीं, बल्कि एकनाथ शिंदे के बेटे और कल्याण से सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे (Dr. Shrikant Shinde) ने संभाल रखी थी। पेशे से आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. श्रीकांत ने राजनीति के मैदान में ऐसी अचूक ‘पॉलिटिकल सर्जरी’ की है, जिससे शिवसेना (यूबीटी) की रीढ़ की हड्डी ही टूट गई है।
इस सफल ऑपरेशन के बाद जहां राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए (NDA) में शिंदे गुट का कद बढ़ा है, वहीं श्रीकांत शिंदे का भी कद एक बड़े राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में स्थापित हो गया है। अब लोग उन्हें एकनाथ शिंदे से भी आगे बता रहे हैं।
युवा सर्जन ने बेहद गोपनीय तरीके से लिखी स्क्रिप्ट
39 वर्षीय युवा नेता डॉ. श्रीकांत शिंदे, जो 2024 में तीसरी बार कल्याण लोकसभा सीट से भारी बहुमत से जीतकर संसद पहुंचे हैं, पिछले कई महीनों से इस गुप्त मिशन पर काम कर रहे थे। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे ‘ऑपरेशन टाइगर’ की भनक एकनाथ शिंदे और उनके बेहद भरोसेमंद 4-5 रणनीतिकारों के अलावा किसी को नहीं थी। श्रीकांत शिंदे ने उद्धव गुट के भीतर असंतुष्ट चल रहे सांसदों से लगातार गोपनीय बैठकें कीं। इस पूरी प्लानिंग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दिल्ली में अंजाम दिया गया, जहां 16 जून को 6 बागी सांसदों को अलग-अलग शहरों से निजी विमानों (Private Jets) के जरिए राष्ट्रीय राजधानी बुलाकर नोएडा के एक सुरक्षित होटल में ठहराया गया था।
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लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात और फिर मुंबई में ग्रैंड एंट्री
दिल्ली पहुंचने के अगले ही दिन यानी 17 जून को डॉ. श्रीकांत शिंदे, धराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर और अन्य बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान सांसदों के आधिकारिक हस्ताक्षर वाला विलय और बगावत का कानूनी प्रस्ताव उन्हें सौंप दिया गया, जिसने उद्धव गुट को पूरी तरह पंगु बना दिया। इसके बाद 22 जून को सभी 6 सांसद मुंबई लौटे और एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल हो गए। हालांकि चर्चा थी कि इस बड़े ऑपरेशन की सफलता के बाद श्रीकांत शिंदे को केंद्र में मंत्री पद मिल सकता है, लेकिन सूत्रों और मंत्री तानाजी सावंत के संकेतों के मुताबिक, शिंदे खुद के बजाय धाराशिव के सांसद ओमप्रकाश राजे निंबालकर को मंत्री बनवा रहे हैं।
‘ये तो बस ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है’
पार्टी में सांसदों के प्रवेश के बाद मीडिया से बात करते हुए डॉ. श्रीकांत शिंदे के तेवर काफी आक्रामक नजर आए। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने हंसते हुए कहा, “पिछले चार सालों से हम सिर्फ राजनीतिक झटके ही दे रहे हैं, यह कोई नई बात नहीं है। जो आज हुआ, वो तो बस एक छोटा सा ट्रेलर है, असली पिक्चर और असली कहानी तो अभी सामने आनी बाकी है। आने वाले दिनों में एक के बाद एक कई और बड़े धमाके होते रहेंगे।”
अब विधायकों की बारी
उन्होंने चुटकी लेते हुए आगे कहा, “आज सुबह से लगातार दो बड़ी राष्ट्रीय सुर्खियां देकर हमारे पत्रकार भाई भी भाग-दौड़ करके थक गए होंगे, इसलिए आज आप लोग थोड़ा आराम कर लीजिए, शांत रहिए। कल हम फिर से एक नई राजनीतिक शुरुआत करेंगे।” श्रीकांत शिंदे के इस बयान ने साफ कर दिया है कि मातोश्री के बचे हुए विधायकों और पार्षदों पर भी ‘ऑपरेशन टाइगर‘ की तलवार लटक रही है और उद्धव ठाकरे के सामने अब अपने बचे हुए कुनबे को संभालने की सबसे बड़ी चुनौती है।
