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नागपुर कांग्रेस में गुडधे बनाम ठाकरे की जंग ने डुबोई नैया: 250+ वोटों का दावा हवा, अपनों ने लोंढे को दिया दगा

Nagpur MLC Election: नागपुर विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस को अपेक्षा से काफी कम वोट मिले। नतीजों के बाद पार्टी में गुटबाजी और क्रॉस वोटिंग के आरोपों ने अंदरूनी कलह को फिर उजागर कर दिया।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Jun 23, 2026 | 10:14 AM

कांग्रेस गुटबाजी, क्रॉस वोटिंग, नागपुर विधान परिषद, प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सौजन्य AI)

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Nagpur MLC Election Result Exposes: नागपुर विधान परिषद चुनाव के परिणाम ने एक बार फिर कांग्रेस के अंदरूनी कलह को सार्वजनिक कर दिया। इस चुनाव में कांग्रेस-मविआ के पास 250 प्लस वोट होने का दावा किया जा रहा था लेकिन उम्मीदवार अतुल लोंढे को 130 वोट ही हासिल हुए। भीतरखाने की मानें तो कांग्रेस के 16 नगरसेवक तो मनपा के ही फूटे हैं। इसके पीछे किसी तरह के लेन-देन का कारण नहीं बल्कि गुटबाजी है।

कुछ समय पूर्व शहर अध्यक्ष का चुनाव हुआ था जिसमें पूर्व अध्यक्ष व विधायक विकास ठाकरे अपने गुट से ही अध्यक्ष बनाने के लिए फील्डिंग लगा रहे थे लेकिन पार्टी ने सुनील केदार के करीबी प्रफुल गुडधे को अध्यक्ष बना दिया। अब कहा जा रहा है कि ठाकरे के गुट के नगरसेवकों ने अपनी नाराजी विप चुनाव में छिपे तौर पर दिखा दी। किसने किसने क्रॉस वोटिंग की, नाम तो उजागर नहीं ही हो सकता लेकिन ऐसा ही चलता रहा तो कांग्रेस की नैया भविष्य में भी डूबती ही रहने वाली है।

बीजेपी ने पहले ही कर दिया था दावा

बता दें कि बीजेपी के नेता ही नहीं बल्कि उम्मीदवार राजीव पोतदार शुरू से ही दावा कर रहे थे कि उन्हें 650 से अधिक वोट हासिल होंगे। उन्होंने कई बार दावा किया था कि पार्टी के करीब 550 वोट तो उनके पक्के हैं लेकिन वोट कहीं अधिक मिलने वाला है। उनके दावे को कांग्रेस के बड़े नेता खारिज कर रहे थे लेकिन परिणाम ने पोतदार के दावे को सही साबित कर दिया। अब चर्चा यह चल रही है कि पोतदार को
कैसे यह मालूम था कि उन्हें 100 वोट विपक्षी दलों से भी मिलने वाले हैं।

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मतलब साफ है कि भीतरी तौर पर ‘हार्स ट्रेडिंग’ चल रही थी। बीजेपी ने खुद अपने नगरसेवकों को नॉट रिचेबल कर दिया था लेकिन कांग्रेस ने अपने मतदाताओं को अपने पक्ष में रखने के लिए कुछ भी नहीं किया था। चूंकि यह चुनाव ‘लाभ उठाने’ वाला ही समझा जाता है, इसलिए कांग्रेस सहित मविआ घटक दल के नगरसेवकों ने जिसे जैसा मौका मिला ‘माया’ दर्शन कर लिये। 99 वोट टूटकर बीजेपी के पाले में चले गए। यह कहने में अतिशयोक्ति नहीं कि कांग्रेस आधी टूट गई। बीजेपी का स्थानीय स्तर पर चलाया गया ‘आपरेशन लोटस’ सफल माना जा रहा है।

केदार व गुडधे को लगा बड़ा झटका

बीजेपी को मिले अतिरिक्त वोट भविष्य की राजनीति में उसके लिए एक मजबूत आधार बन सकते हैं। अब कांग्रेस के भीतर यह विश्लेषण किए जाने के संकेत हैं कि किस गुट और किन नेताओं के समर्थक भाजपा के पक्ष में गए। भाजपा के सूत्रों का दावा है कि शहर के आधे से अधिक कांग्रेस समर्थक नगरसेवकों ने भी क्रॉस वोटिंग की और ग्रामीण क्षेत्र में भी बड़ा झटका लगा।

यह झटका प्रफुल गुडधे व सुनील केदार के लिए भविष्य में भी भारी चुनौती साबित होगी। इन घटनाक्रमों के बाद कांग्रेस में नए विवाद खड़े होने और नेताओं व पदाधिकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस ने भाजपा पर धनबल के उपयोग का आरोप लगाया है लेकिन बीजेपी ने आरोपों को खारिज करते हुए चुनौती दी कि यदि ऐसा हुआ है तो कोई एक नगरसेवक सामने लाकर दिखाया जाए।

‘पोल मैनेजर’ हो गए थे सक्रिय

चुनाव से पहले पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने महाविकास आघाड़ी के नेताओं से निर्विरोध चुनाव कराने की अपील की थी, लेकिन उन्हें कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि से एक दिन पहले उन्होंने स्थानीय नेताओं को चुनाव होने की जानकारी देते हुए अधिक से अधिक वोट जुटाने की रणनीति बनाने के निर्देश दिए, इसके बाद भाजपा के ‘पोल मैनेजर सक्रिय हो गए, जिनकी टीम में 6 सदस्य शामिल थे।

पहले अपने मतदाताओं को पर्यटन स्थलों पर भेजा। दूसरी ओर, कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अपेक्षित स्तर की राजनीतिक घेराबंदी नहीं कर सके, नेताओं को विश्वास था कि कम से कम गठबंधन के सभी वोट उन्हें मिलेंगे, लेकिन पार्टी निष्ठा निभाने के बजाय 99 नगरसेवक कथित रूप से विरोधी खेमे के प्रभाव में चले गए।

संविधान बचाने की लड़ाई लड़ी: लोंढे

कांग्रेस उम्मीदवार अतुल लोंढे ने कहा कि इस चुनाव में जीत-हार मुद्दा नहीं था बल्कि पैसे की ताकत और पुलिस तथा इंडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों के दबाव के खिलाफ खड़े रहना महत्वपूर्ण था, पैसे के बल पर और विभिन्न एजेंसियों के दबाव में राजनीति किए जाने के विरोध में उन्होंने यह लडाई लड़ी। लोंढे ने कहा कि देश में सांसद, विधायक खरीदे जाते हैं, राजनीतिक दल तोड़े जाते हैं।

ऐसी स्थिति में कांग्रेस लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान को बचाने की लड़ाई लड़ रही है, इसलिए इस चुनाव को केवल परिणाम के आधार पर नहीं देखा जा सकता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उनकी उम्मीदवारी के कारण भाजपा के नगरसेवकों को गोवा टूर और पर्यटन का अवसर मिला, इसके लिए उन्हें मेरा आभार मानना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कितने वोट टूटे या किसने मतदान किया, इस पर वे विचार नहीं करेंगे, जिन्होंने वोट दिया उनका भी भला हो और जिन्होंने नहीं दिया उनका भी भला हो। किसी प्रकार की शिकायत नहीं की जाएगी। भाजपा के कुछ नगरसेवकों ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

कांग्रेस के 39 वोट फूटे

कांग्रेस के नवनियुक्त शहर अध्यक्ष प्रफुल गुडधे ने माना कि चुनाव में 39 वोट टूटे हैं लेकिन पार्टी संगठन को मजबूत करने के प्रयास जारी रहेंगे, जो लोग पैसे या दबाव के आधार पर पार्टी छोड़ना चाहते हैं उन्हें रोका नहीं जाएगा। जो आज टूटे हैं, वे कल भी टूटेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सवा 100 साल पुरानी पार्टी है। यह किसी नेता की नहीं बल्कि जनता की पार्टी है।

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नेता जा सकते हैं लेकिन जनता कांग्रेस के साथ बनी रहेगी। नागपुर में संख्या बल कम होने के बावजूद चुनाव लड़ना आवश्यक था। उन्होंने आरोप लगाया कि पैसे और दबाव के चल पर एकतरफा मतदान कराने का प्रयास किया गया लेकिन लगभग 130 मतदाताओं ने लोकतंत्र के पक्ष में मजबूती से मतदान किया। यह भी सवाल उठाया कि जब सांसद और विधायक ही दल बदल रहे हैं तो नगरसेवकों से अलग अपेक्षा कैसे की जा सकती है। पार्टी तोड़ने वाले जितने दोषी है उत्तने ही उन्हें बढ़ावा देने वाले भी दोषी है।

Mlc election result exposes congress factionalism and cross voting allegations nagpur

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Published On: Jun 23, 2026 | 10:14 AM

Topics:  

  • Election Results
  • Maharashtra Legislative Council Elections
  • Maharashtra Politics
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