Dharavi Redevelopment Project: 10 लाख लोगों के आशियाने पर संकट? जानिए क्यों अटका एशिया का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट?
Dharavi Slum Redevelopment: मुंबई की धारावी पुनर्विकास परियोजना में एक परिवार, एक घर नियम, किरायेदारों के दस्तावेजी विवाद और पारिवारिक उलझनों के कारण 10 लाख लोगाें का पुनर्वास बड़ी चुनौती बन गया है।
- Written By: आकाश मसने
धारावी स्लम (सोर्स: सोशल मीडिया)
Dharavi Redevelopment Project Challenges: मुंबई की धारावी पुनर्विकास परियोजना (DRP) संभवतः भारत में अब तक शुरू की गई सबसे बड़ी और सबसे महत्वाकांक्षी स्लम पुनर्वास पहल है। एशिया की सबसे बड़ी अनौपचारिक बस्तियों में से एक का कायाकल्प करने के उद्देश्य से शुरू की गई इस परियोजना का लक्ष्य लगभग 10 लाख निवासियों को स्थायी घर प्रदान करना है, और साथ ही एक आधुनिक, एकीकृत व समावेशी शहरी पड़ोस का निर्माण करना है।
धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट मुंबई को झुग्गी-मुक्त बनाने के महाराष्ट्र सरकार के दृष्टिकोण का भी मुख्य हिस्सा है। कागजों पर इसका उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है। असुरक्षित और भीड़भाड़ वाले मकानों की जगह सुरक्षित घर और बेहतर बुनियादी ढांचा उपलब्ध करना। हालांकि, जमीनी हकीकत कहीं अधिक जटिल है। हर स्लम पुनर्वास प्रोजेक्ट की तरह धारावी का पुनर्विकास भी सख्त दस्तावेजी आवश्यकताओं और पात्रता नियमों से संचालित होता है।
एक पात्र परिवार के लिए एक घर
हालांकि इन नियमों को निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है, लेकिन इनका कार्यान्वयन अक्सर स्वामित्व, किराएदारी और पारिवारिक व्यवस्था से जुड़ी कठिन स्थितियां पैदा करता है।
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स्लम पुनर्वास के मूल सिद्धांतों में से एक है ‘एक पात्र परिवार के लिए एक घर’ मौजूदा एसआरए मानदंडों के तहत, एक से अधिक झोपड़ियों के स्वामित्व का मतलब यह नहीं है कि पुनर्वास के तहत एक से अधिक घर मिलेंगे। यह कई लोगों के लिए असहमति और विवाद का कारण बन गया है, जो एक से अधिक संरचनाओं के मालिक हैं और पुनर्विकास के तहत बड़े लाभ की उम्मीद कर रहे हैं। निजी भूमि का स्वामित्व एक और संवेदनशील मुद्दा है।
चूंकि धारावी अब महाराष्ट्र सरकार के डीआरपी/एसआरए के अधिकार क्षेत्र के तहत ‘धारावी अधिसूचित क्षेत्र’ में आता है, इसलिए मुआवजे के मानदंड मौजूदा नियमों द्वारा शासित होते हैं। कुछ भूमि मालिकों का तर्क है कि रेडी रेकनर दर का 25% मुआवजा मौजूदा बाजार दरों को नहीं दर्शाता है।
किरायेदारों से जुड़े मामले चुनौतीपूर्ण
शायद सबसे चुनौतीपूर्ण मामले झुग्गियों में रहने वाले किरायेदारों से जुड़े हैं। कई मामलों में, दशकों से किराए पर रह रहे निवासी सर्वेक्षण प्रक्रिया के दौरान स्वामित्त्व दस्तावेज न होने के कारण अपना हक साबित नहीं कर पाते हैं, क्योंकि मूल मालिक कहीं और रहते हैं। ऐसी स्थितियां अक्सर दस्तावेजों, अधिकारों के हस्तांतरण और पात्रता को लेकर असहमति पैदा करती हैं, जिससे किराएदार अनिश्चितता में फंस जाते हैं। ज्यादातर मामलों में मालिक अधिकारों के हस्तांतरण के बदले बड़ी रकम की मांग करते हैं क्योंकि एसआरए नियमों के अनुसार, मुंबई में किसी अन्य योजना के तहत पहले से संपत्ति रखने वाले व्यक्ति को धारावी पुनर्वास परियोजना के तहत विचार नहीं किया जाएगा।
पारिवारिक व्यवस्थाएं भी बड़ी एक मुश्किल
पारिवारिक व्यवस्थाएं भी अनूठी चुनौतियां पेश करती है। धारावी के कई घरों में, एक ही परिवार की कई पीढ़ियां एक ही इमारत की अलग-अलग मंजिलों पर रहती हैं। हालांकि, पुनर्वास की पात्रता मंजिल के कब्जे और रहने की तारीख से संबंधित विशिष्ट मानदंडों द्वारा तय की जाती है। इसके परिणामस्वरूप, एक ही परिवार के सदस्य अलग-अलग पात्रता श्रेणियों और अलग-अलग स्थानों के लिए योग्य हो सकते हैं, जिससे सभी के लिए एक साथ रहना मुश्किल हो जाता है।
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यह भी असहमति और विवाद का एक प्रमुख कारण बन रहा है। ऐसे भी मामले हैं जहां भूतल के परिवार के सदस्य को प्रभावित करने वाले दस्तावेजी मुद्दों का असर उसी इमारत की ऊपरी मंजिलों के निवासियों पर पड़ सकता है। यदि भूतल का निवासी अपनी पात्रता साबित करने में विफल रहता है, तो वह ऊपरी मंजिल के निवासी के हलफनामे का सत्यापन नहीं कर सकता है।
