मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटिल (सोर्स: सोशल मीडिया)
Congress Attack Devendra Fadnavis Investment Claim: महाराष्ट्र की राजनीति में निवेश के आंकड़ों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता अतुल लोंढे ने देवेंद्र फडणवीस सरकार पर ‘कागजी निवेश’ का आरोप लगाते हुए पूछा है कि अगर पिछले कुछ वर्षों में लाखों करोड़ का निवेश आया है, तो वह जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा?
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटिल ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य सरकार की निवेश नीति को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दावोस से लौटने के बाद 30 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश का दावा कर रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। लोंढे ने सिलसिलेवार तरीके से आंकड़ों को रखते हुए कहा कि 2023-24 में एकनाथ शिंदे के कार्यकाल के दौरान 3.60 लाख करोड़ और फिर 2024-25 में 15 लाख करोड़ के निवेश की बातें कही गईं। अब यह आंकड़ा बढ़कर 30 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो कि पूरी तरह संदेहास्पद है।
अतुल लोंढे ने तंज कसते हुए पूछा कि “क्या ये भारी-भरकम आंकड़े इसलिए पेश किए जा रहे हैं ताकि देवेंद्र फडणवीस खुद को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में प्रोजेक्ट कर सकें?” उन्होंने तर्क दिया कि यदि पिछले तीन वर्षों में वास्तव में 50 लाख करोड़ रुपये का निवेश महाराष्ट्र में आया होता, तो राज्य की आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदल जानी चाहिए थी। बेरोजगारी खत्म हो जानी चाहिए थी और बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव दिखना चाहिए था, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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कांग्रेस ने सीधे तौर पर सरकार को घेरते हुए कहा कि अगर इतना पैसा निवेश के जरिए आ रहा है, तो उसका लाभ आम आदमी को क्यों नहीं मिल रहा? लोंढे ने मांग की कि यदि लाखों करोड़ का निवेश आया है, तो ‘लाडकी बहिन’ योजना की राशि बढ़ाकर 2,100 रुपये क्यों नहीं की जा रही? महाराष्ट्र के किसानों का संपूर्ण कर्ज अब तक माफ क्यों नहीं हुआ? राज्य सरकार पर चढ़े हुए कर्ज के बोझ को कम करने के लिए इन निवेशों का इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा?
कांग्रेस प्रवक्ता ने अतुल लोंढे पाटिल ने आरोप लगाया कि महायुति सरकार जनता को गुमराह कर रही है। आंकड़ों का मायाजाल बुनकर लोगों का ध्यान असल मुद्दों जैसे महंगाई और बेरोजगारी से भटकाया जा रहा है। उन्होंने चुनौती दी कि सरकार श्वेत पत्र जारी कर बताए कि पिछले 5 वर्षों में कितने प्रोजेक्ट वास्तव में शुरू हुए और उनसे कितने लोगों को रोजगार मिला।