हेमंत सोरेन और गोगोई की मुलाकात (सोर्स-सोशल मीडिया)
Congress-JMM Equation In Assam: असम में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अध्यक्ष हेमंत सोरेन की सक्रियता ने पूर्वोत्तर की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। इसी क्रम में गुरुवार को रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास में असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने उनसे मुलाकात की। इस बैठक को असम चुनाव के संदर्भ में विपक्षी दलों के संभावित तालमेल और रणनीतिक समन्वय की दिशा में अहम माना जा रहा है।
बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह तथा झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी के. राजू भी मौजूद थे। आधिकारिक तौर पर इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे असम चुनाव को लेकर विपक्षी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मीडिया एजेंसी आईएएनएस के सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान आगामी असम विधानसभा चुनाव, झारखंड में चल रही विकास योजनाओं और समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही असम में झामुमो और कांग्रेस के बीच संभावित चुनावी तालमेल और सीट बंटवारे को लेकर भी प्रारंभिक बातचीत की गई। माना जा रहा है कि दोनों दल राज्य में आदिवासी और अन्य सामाजिक समूहों को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत गठबंधन बनाने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।
दरअसल, पिछले डेढ़ महीने में हेमंत सोरेन ने असम में दो बड़ी जनसभाओं को संबोधित किया है। फरवरी में तिनसुकिया जिले में आयोजित आदिवासी महासभा की रैली और इसके बाद विश्वनाथ जिले में हुई सभा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इन सभाओं में उन्होंने खास तौर पर चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासी समुदाय की पहचान, सम्मान और अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। झामुमो का मानना है कि असम में झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से जाकर बसे लाखों आदिवासी समुदाय एक महत्वपूर्ण राजनीतिक शक्ति हैं।
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झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव और झारखंड सरकार में मंत्री सुदिव्य कुमार का कहना है कि पार्टी का लक्ष्य देश के लगभग 12 करोड़ आदिवासियों की मजबूत आवाज बनना है। उनके मुताबिक असम में मिल रहे जनसमर्थन से यह संकेत मिल रहा है कि वहां आदिवासी समाज राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर नई उम्मीदें देख रहा है।