तेंदुओं को मारना अब हर स्थिति में अपराध नहीं, आत्मरक्षा में कार्रवाई की अनुमति, सरकार का बड़ा फैसला
Maharashtra Leopard Attack Policy: महाराष्ट्र सरकार ने तेंदुओं के बढ़ते हमलों को देखते हुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत उन्हें अनुसूची-1 से अनुसूची-2 में लाने का प्रस्ताव मंजूर किया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
human leopard conflict Maharashtra (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai News: महाराष्ट्र में तेंदुओं के बढ़ते हमलों से परेशान नागरिकों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने तेंदुओं को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 से हटाकर अनुसूची-2 में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने का निर्णय लिया है।
इस फैसले के बाद मानव बस्तियों में घुसकर लोगों पर हमला करने वाले तेंदुओं के खिलाफ आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई को लेकर कानूनी प्रक्रिया में ढील दी जा सकती है। सरकार का कहना है कि जिन क्षेत्रों में तेंदुओं का आतंक बढ़ रहा है, वहां नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
pic.twitter.com/McbnFmaaxr — Satyajit Deshmukh (@Satyajit_D_BJP) March 12, 2026
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लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित
यह मुद्दा विधानसभा में सत्यजीत देशमुख, विनय कोरे और नीलेश राणे सहित कई विधायकों ने उठाया था। उनका कहना था कि कई इलाकों में तेंदुओं के हमले बढ़ने से ग्रामीणों में भय का माहौल है और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
सरकार की ओर से बताया गया कि मानव बस्तियों में घुसकर नुकसान पहुंचाने वाले तेंदुओं को ‘आदमखोर’ घोषित करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। ऐसे मामलों में आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई पर कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा।
बंध्याकरण और स्थानांतरण की योजना
राज्य सरकार ने तेंदुओं की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार को 150 तेंदुओं के बंध्याकरण का प्रस्ताव भेजा था। इस पर केंद्र ने प्रायोगिक तौर पर 5 मादा तेंदुओं के बंध्याकरण की अनुमति दी है।
संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में वन कर्मियों की गश्त बढ़ाई जा रही है, स्कूलों के समय को लचीला रखने के निर्देश दिए गए हैं तथा केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति से तेंदुओं को अन्य राज्यों के चिड़ियाघरों और बचाव केंद्रों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
