Devendra Fadnavis statement (सोर्सः सोशल मीडिया)
Ajit Pawar Tribute: महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र का पहला दिन बेहद गमगीन रहा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में दिवंगत पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन पर शोक प्रस्ताव रखते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। फडणवीस ने कहा कि राज्य ने एक ऐसा नेता खो दिया है, जो महाराष्ट्र का ‘सर्वोत्तम मुख्यमंत्री’ बनने की पूरी क्षमता रखता था।
सीएम फडणवीस ने भावुक होते हुए कहा, “अजित और मेरा जन्मदिन एक ही दिन आता है। वह मुझसे 11 साल बड़े थे और सही मायने में मेरे बड़े भाई (दादा) थे। उनके रूप में राज्य को सबसे अच्छा मुख्यमंत्री मिल सकता था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।” सदन में अजित की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए फडणवीस ने कहा कि वे हमेशा समय के पाबंद रहते थे। वे कभी भी वक्त नहीं चूकते थे, लेकिन उस दिन नियति ने उन्हें हमसे छीन लिया।
28 जनवरी को बारामती हवाई पट्टी के पास हुई विमान दुर्घटना का जिक्र करते हुए फडणवीस ने बताया कि 27 जनवरी को दोनों ने कैबिनेट और अवसंरचना समिति की बैठकों में साथ हिस्सा लिया था। किसी ने भी नहीं सोचा था कि वह उनकी आखिरी मुलाकात होगी।
फडणवीस ने कहा कि यदि वे जीवित होते तो इस साल अपना 12वां बजट पेश करते और भविष्य में शेषराव वानखेड़े के 13 बजट पेश करने के रिकॉर्ड को भी तोड़ देते। ‘लाडली बहन’ योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के लिए 46,000 करोड़ रुपये का प्रावधान उनके कुशल वित्तीय प्रबंधन का परिणाम था।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधान परिषद में अजित पवार को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “राजनीति में आपके कई फैसले सही थे, लेकिन दुनिया छोड़ने का यह फैसला गलत साबित हुआ। इसे वापस लें और लौट आइए।”
उन्होंने कहा कि सीएम देवेंद्र, अजित और वे राज्य की स्थिरता का एक मजबूत “त्रिकोण” थे। जब वे महाविकास आघाड़ी के जरिए साथ आए, तब उनके जैसा विश्वसनीय दोस्त कितना अनमोल है, यह समझ में आया। शिंदे ने प्रमोद महाजन, गोपीनाथ मुंडे और आर. आर. पाटिल के साथ अजित पवार को उन नेताओं की श्रेणी में रखा, जिनके जाने से महाराष्ट्र अनाथ हो गया।
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पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा, “राजनीति में लोग आते-जाते हैं, लेकिन अजित जैसा दिलदार और भरोसेमंद दोस्त खोना अपूरणीय क्षति है।” उन्होंने कहा कि कोरोना काल में राज्य की अर्थव्यवस्था संभालने में उनकी भूमिका अतुलनीय थी।
उद्धव ने उनके अनुशासन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी मेज पर हर चीज व्यवस्थित रहती थी, बिल्कुल शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की तरह। उन्होंने कहा कि अधिकारी उनके सामने हमेशा सतर्क रहते थे, क्योंकि उनकी नजर फाइल पर पड़ते ही गलतियां पकड़ लेती थी। उन्होंने अजित को किसी भी मुख्यमंत्री के लिए ‘सर्वोत्तम वित्त मंत्री’ बताया।