नागपुर-मुंबई दुरंतो का वर्धा ठहराव विवादों में, टाइमिंग पर उठे सवाल; यात्रियों में नाराजगी
Nagpur Duronto Timing Issue: नागपुर-मुंबई दुरंतो को वर्धा में नया ठहराव मिला, लेकिन 1 मिनट और 15 मिनट के असमान समय से यात्रियों में नाराजगी और सवाल खड़े हुए।
- Written By: अंकिता पटेल
दुरंतो एक्सप्रेस विवाद( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nagpur Duronto Wardha Stop: नागपुर में रेल मंत्रालय द्वारा मध्य रेल की सबसे सफल प्रीमियम ट्रेनों में शामिल ट्रेन 12290/89 नागपुर-मुंबई-नागपुर दुरंतो एक्सप्रेस को वर्धा स्टेशन पर दिया गया नया ठहराव जहां एक ओर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने का दावा करता है वहीं दूसरी ओर इसकी टाइमिंग नाराजगी और हैरत भरा सवाल खड़ा करने को काफी है।
ट्रेन 12290 को यहां केवल एक मिनट और ट्रेन 12289 को सीधे 15 मिनट रोके जाने पर यात्रियों को रेलवे की कार्यप्रणाली पर तीखा तंज कसने का मौका मिल गया है।
यह बात समझ से परे है कि एक मिनट में कितने यात्री सुविधापूर्वक चढ़-उत्तर सकेंगे और 15 मिनट तक कितने यात्री ट्रेन में चढ़ते और उत्तरते रहेंगे, बुधवार, 15 अप्रैल से लागू नई समयसारिणी के अनुसार, 12290 नागपुर-मुंबई दुरंतो वर्धा स्टेशन पर रात 20:44 पर आयेगी और 20:45 पर प्रस्थान करेगी। वापसी में ट्रेन 12289 सुबह 6:57 बजे वर्धा आयेगी और 15 मिनट बाद 7:12 बजे नागपुर के लिए रवाना होगी।
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क्या नेता तय करते हैं स्टॉपेज
कोविड के बाद कई शहरों में ट्रेनों के स्टापेज पर कैची चलाने के बाद अब किसी-किसी स्टेशन पर नेतागिरी के चलते एक मिनट का स्टॉपेज देने से गुरेज नहीं किया जा रहा है।
आधुनिक भारतीय रेलवे नीति के इस दोहरे रवैये पर अब सवाल उठने लगे हैं। ज्ञात हो कि वर्षा में दुरतों के स्टॉपज के लिए एक पूर्व मंत्री ने रेल मंत्री वैष्णव से सिफारिश की थी।
हजारों यात्रियों से कम यात्री संख्या बताकर स्टॉपेज की दैनिक जीवन सुविधा छीनने वाले रेलवे ने भी यहां एक मिनट ही सही लेकिन स्टॉपज मंजूर कर दिया, हालांकि, सीनियर डीसीएम मितल ने बताया कि लंबे समय से यात्रियों की मांग को ध्यान में रखते हुए यह स्टापेज मंजूर किया गया है।
40 मिनट में ही स्टॉपेज, ये कैसी प्रीमियम ट्रेन
इस दुरतो को हमेशा प्रीमियम ट्रेन के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है। टिकटों की भारी डिमांड के चलते इसमें पत्लेक्सी फेयर सिस्टम में लागू है। इससे टिकट का किराया श्रेणी के अनुसार 600 से 1200 रुपये तक बढ़ जाता है।
इसके बावजूद यात्री इसे पसंद करते थे क्योंकि नागपुर से चलकर सीधे बडनेरा, भुसावल और फिर सीधे मुंबई में सकती थी, लेकिन अब केवल 40 मिनट बाद वर्धा भी रुकेगी और वापसी में यहां 15 मिनट आराम भी करेगी, यह असंतुलित टाइमिंग, रेलवे की योजना और क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है कि आखिर ये कैसी प्रीमियम ट्रेन है। इससे बेहतर है कि इसे मेल या एक्सप्रेस ही घोषित कर दिया जाये।
जोखिमभरा व जख्मों पर नमक है यह स्टॉपेज
यात्रियों का कहना है कि एक मिनट में ट्रेन में चढ़ना उतरना न केवल कठिन है बल्कि जोखिम भरा भी हो सकता है।
खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए।
क्या रेलवे ने इस पहलू पर विचार किया है? यह भी एक बड़ा प्रश्न है। इस फैसले ने उन हजारों यात्रियों के जख्मों पर नमक रगड़ दिया है जो कोचिड काल के बाद से अपने-अपने शहरों में ट्रेनों के ठहराव के लिए लगातार मांग कर रहे है।
कई जगहों पर स्टॉप देने से यह कहकर मना कर दिया गया कि इससे समय और संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
लेकिन वर्षा में एक मिनट का प्रतीकात्मक वहराच देकर क्या वास्तव में रेलवे ने कोई बड़ा खर्च बचा लिया है?
अन्य स्टेशनों पर स्टॉपेज की मांगों पर विचार कब
इसमें कोई दोराय नहीं कि मुंबई जाने और आने के लिए दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेन का वर्षों में स्टॉपेज देना स्थानीय नागरिकों के लिए फायदेमंद ही साबित होगा लेकिन केवल एक मिनट का समय कितना उचित है, यह हर किसी की समझ से परे है।
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इसे कम से वाम 2 से 3 मिनट करना अनिवार्य है लेकिन इसके साथ उन स्टेशनों पर भी कुछ ट्रेनों के स्टॉपज पर विचार किया जाना थाहिए जी हजारों यात्रियों की दैनिक जीवन से जुड़े हैं जिन ट्रेनों के स्टॉपज से उनके शहर और नागपुर के बीच उनका नौकरी, काम-धंधा या आय का साधन निर्भर है।
-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से सतीश दंडारे की रिपोर्ट
