विपक्ष का महा-पाप: 70 करोड़ महिलाओं के अधिकारों की ‘भ्रूणहत्या’; फडणवीस का जोरदार पलटवार
Devendra Fadnavis Press Conference: देवेंद्र फडणवीस का विपक्ष पर तीखा हमला, महिला आरक्षण विधेयक के गिरने को बताया 70 करोड़ महिलाओं के साथ विश्वासघात और 'भ्रूणहत्या'। जानें परिसीमन का पूरा इतिहास।
- Written By: गोरक्ष पोफली
देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
Devendra Fadnavis Press Conference News: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महिला आरक्षण विधेयक के पारित न हो पाने को लेकर विपक्षी दलों पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विपक्षी दलों ने न केवल संसदीय मर्यादा का उल्लंघन किया है, बल्कि देश की 70 करोड़ महिलाओं के सपनों के साथ विश्वासघात किया है। फडणवीस के अनुसार, 17 अप्रैल का दिन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक ‘वॉटरशेड मोमेंट’ (ऐतिहासिक मोड़) बनने की दहलीज पर था, लेकिन विपक्षी गठबंधन की नकारात्मक राजनीति ने इसे एक विफलता में बदल दिया।
‘भ्रूणहत्या’ और महिलाओं का अपमान
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों की भूमिका को ‘पाप’ की श्रेणी में रखते हुए कहा कि जिस क्रांतिकारी कदम से भारत की आधी आबादी को सत्ता के शीर्ष पर हिस्सेदारी मिलने वाली थी, विपक्ष ने उस विधेयक की ‘भ्रूणहत्या’ कर दी है। उन्होंने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), उद्धव ठाकरे गुट, शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि इन दलों ने केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के कारण बहुमत को बाधित किया। फडणवीस ने इसे महिला सशक्तिकरण के मार्ग में एक ऐतिहासिक रोड़ा बताया।
महात्मा फुले की विरासत और विपक्ष का दोहरा चेहरा
मुख्यमंत्री ने इस विवाद को महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले की विरासत से जोड़ते हुए विपक्ष को आईना दिखाया। उन्होंने याद दिलाया कि यह वर्ष महात्मा फुले की 200वीं जयंती का वर्ष है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “विपक्षी दल केवल मंचों से भाषण देने के लिए फुले के नाम का उपयोग करते हैं, लेकिन जब उनके महिला सशक्तिकरण के विचारों को वास्तव में लागू करने का समय आया, तो उन्होंने उन्हीं विचारों को तिलांजलि दे दी।” फडणवीस ने दावा किया कि विपक्ष का यह दोहरा चरित्र अब जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।
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परिसीमन का जटिल इतिहास और संवैधानिक पक्ष
विपक्ष के ‘चुनावी स्टंट’ वाले आरोपों का खंडन करने के लिए मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक और संवैधानिक तथ्यों का सहारा लिया। उन्होंने बताया कि 1971 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों को 2000 तक स्थिर (Freeze) किया गया था। 2002 में परिसीमन आयोग बनने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने यह सुनिश्चित किया कि महाराष्ट्र और दक्षिण भारतीय राज्यों जैसे क्षेत्रों पर अन्याय न हो, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई थी।
इसके लिए उन्होंने इसे 20 वर्षों के लिए और बढ़ा दिया था। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि 2023 के संशोधन में पहले ही यह तय था कि आरक्षण नए परिसीमन के बाद ही प्रभावी होगा। इसलिए, इसे चुनावी हथकंडा कहना गलत है; यह एक लंबी और पारदर्शी संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
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‘डमरू’ और दोहरी मानसिकता का जवाब
संजय राउत जैसे नेताओं के बयानों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग आज डमरू बजाने और विरोध करने की बात कर रहे हैं, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि 2023 में जब यह कानून बना था, तब उन्होंने भी इसका समर्थन किया था। अब मतदान के समय पीछे हटना उनकी ‘खराब मानसिकता’ का प्रमाण है। उन्होंने अंत में जनता से अपील की कि वे उन ताकतों को पहचानें जो महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखना चाहती हैं।
