ED Raid: अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़े बैंक घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, छापेमारी में जब्त हुए अहम दस्तावेज

ED Raid: ईडी को बैंक घोटाले मामले में छापेमारी के दौरान रिलायंस अनिल अंबानी समूह के स्वामित्व या नियंत्रण से जुड़े संदिग्ध लेनदेन और संपत्तियों से संबंधित अहम सबूत मिले हैं।
reliance anil ambani group
रिलांयस अनिल अंबानी ग्रुप, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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ED Raid Anil Ambani Group: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंक घोटाला मामले की जांच के तहत ई-कॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके एक निदेशक के आवास पर छापेमारी अभियान चलाया। जहां रिलायंस अनिल अंबानी समूह के स्वामित्व या नियंत्रण से जुड़े संदिग्ध लेनदेन और संपत्तियों से संबंधित अहम सबूत जब्त किए गए हैं। बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी सामने आई है। बयान में कहा गया है कि तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, अचल संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड और बैंक घोटाले की जांच से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए हैं।

अब तक की जांच में सामने आया है कि रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) द्वारा जुटाए गए हजारों करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन को रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के नियंत्रण और प्रबंधन वाली शेल तथा समूह की अन्य कंपनियों के नेटवर्क के जरिए सुनियोजित तरीके से दूसरी जगह भेजा गया।

फर्जी तरीके से कंपनियों को लोन दी गई

जांच एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों को सामान्य बैंकिंग नियमों का गंभीर उल्लंघन करते हुए पर्याप्त जांच-पड़ताल, उचित दस्तावेजी प्रक्रिया और लोन चुकाने की क्षमता का आकलन किए बिना कॉरपोरेट लोन मंजूर किए गए। जिन कंपनियों को यह कर्ज मिला, वे आर्थिक रूप से कमजोर थीं, उनका वास्तविक कारोबारी संचालन नहीं था और उनके पास लोन चुकाने की क्षमता भी बेहद सीमित थी। ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि इन शेल कंपनियों के निदेशक रिलायंस अनिल अंबानी समूह के कर्मचारी या करीबी सहयोगी थे और वे समूह के वरिष्ठ प्रबंधन के निर्देशों पर काम कर रहे थे।

जांच एजेंसी के मुताबिक, इन कंपनियों के बैंक खाते और लेखा-जोखा समूह की प्रमुख कंपनियों रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, रिलायंस पावर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के अधिकारियों द्वारा संचालित किए जाते , जिससे इन शेल कंपनियों पर समूह के प्रभावी नियंत्रण की पुष्टि होती है। ईडी ने इस मामले में 12 जून 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) भी दाखिल की थी।

4,510 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क

जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में अब तक 15,548 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का आकलन किया गया है। वहीं, 4,510 करोड़ रुपये की संपत्तियां पीएमएलए के तहत कुर्क की जा चुकी हैं, जिनमें से 3,926 करोड़ रुपये की कुर्की को अब तक निर्णायक प्राधिकरण भी मंजूरी दे चुका है। इससे पहले ईडी ने 15 अप्रैल 2026 को इस मामले में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व निदेशक अमिताभ झुनझुनवाला और पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) अमित बापना को गिरफ्तार किया था।

जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों की आरएचएफएल और आरसीएफएल से धन के कथित डायवर्जन में सक्रिय भूमिका थी। उस समय आरएचएफएल और आरसीएफएल, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड की सहायक कंपनियां थीं। फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। मामले की जांच अभी जारी है।

CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर एक्शन

जांच एजेंसी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड द्वारा सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग और गबन से जुड़े मामलों की जांच कर रही है। यह जांच सीबीआई द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। ये एफआईआर यस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक की शिकायतों के बाद दर्ज की गई थीं।

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