Mumbai News: पश्चिमी उपनगरों में BJP का दबदबा, उत्तर पश्चिम जिले में शिंदे गुट को झटका
BMC Election: बीएमसी चुनाव में मुंबई के पश्चिमी उपनगरों में भाजपा–महायुति का दबदबा रहा, जबकि उत्तर पश्चिम जिले में पाला बदलने वाले शिंदे गुट और भाजपा उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा।
- Written By: आंचल लोखंडे
BMC Election :बीएमसी चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
North-West Mumbai: बीएमसी चुनाव में मुंबई के पश्चिमी उपनगरों में भाजपा-महायुति ने स्पष्ट बढ़त हासिल करते हुए अपना दबदबा कायम रखा है। बांद्रा पूर्व को छोड़कर बांद्रा से दहिसर तक की अधिकांश विधानसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। भाजपा ने इसे विकास के नाम पर मिली जनस्वीकृति बताया है।
पश्चिमी उपनगरों में दहिसर, बोरीवली, कांदिवली और विले पार्ले जैसे इलाकों में गुजराती मतदाताओं की संख्या अधिक है, जहां भाजपा के विधायक भी मजबूत स्थिति में हैं। विधायक आशीष शेलार सहित महायुति के सभी प्रमुख नेता मैदान में सक्रिय रहे। इस क्षेत्र में मुख्य मुकाबला भाजपा-महायुति और शिवसेना (यूबीटी) के बीच रहा, जबकि कुछ वार्डों में कांग्रेस के कारण त्रिकोणीय संघर्ष भी देखने को मिला।
मनसे को नहीं मिली खास सफलता
यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने पश्चिमी उपनगरों में शाखा दौरे, बैठकों और प्रचार पर जोर दिया, लेकिन बांद्रा पूर्व को छोड़कर इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला। मनसे को इस पूरे क्षेत्र में खास सफलता नहीं मिली और वह केवल एक सीट जीत सकी। वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) ने भी कुछ सीटों पर जीत दर्ज की।
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बांद्रा पूर्व में यूबीटी की मजबूत पकड़
भाजपा के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने पश्चिमी उपनगरों में दूसरी सबसे बड़ी सफलता हासिल की, जिसमें बांद्रा पूर्व विधानसभा क्षेत्र प्रमुख रहा। यहां विधायक वरुण सरदेसाई के कार्यों का असर दिखा और यूबीटी को बीएमसी वार्डों में बढ़त मिली।गोरेगांव पूर्व के वार्ड क्रमांक 73 में यूबीटी की लोना रावत ने दीप्ति वायकर-पोटनीस को हराया। यह मुकाबला सांसद रविंद्र वायकर के लिए प्रतिष्ठा का विषय था, लेकिन वे अपनी बेटी को जिताने में सफल नहीं हो सके।
तीन तरफा मुकाबले में कांग्रेस का खाता
पश्चिमी उपनगर के वार्ड क्रमांक 90 में त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस की ट्यूलिप मिरांडा ने मात्र सात वोटों से जीत दर्ज की, जो इस चुनाव की सबसे कम अंतर वाली जीत रही।
मातोश्री के पास स्थित वार्ड क्रमांक 93 में यूबीटी ने अपना गढ़ बरकरार रखा। यहां रोहिणी कांबले और पूजा महादेश्वर ने जीत दर्ज की।
नगरसेवकों की संख्या (पश्चिमी उपनगर)
- भाजपा: 43
- शिवसेना (शिंदे): 07
- शिवसेना (यूबीटी): 21
- कांग्रेस: 09
- मनसे: 02
- राकां (एसपी): 01
उत्तर पश्चिम जिले में नहीं चला भाजपा-शिंदे गुट का जादू
उत्तर पश्चिम जिले में बीएमसी चुनाव के दौरान पाला बदलने वाले नेताओं को जनता ने सिरे से नकार दिया। शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर शिंदे गुट में शामिल हुए 10 उम्मीदवारों को इस क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा। उत्तर पश्चिम जिले के सांसद रविंद्र वायकर अपनी पुत्री एडवोकेट दीप्ति वायकर को भी जीत नहीं दिला सके। इससे पहले उनकी पत्नी मनीषा वायकर भी जोगेश्वरी पूर्व विधानसभा चुनाव हार चुकी हैं।
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बांद्रा से दहिसर तक महायुति का वर्चस्व
शिंदे गुट के केवल चार उम्मीदवार ही इस क्षेत्र से जीत सके। 2017 के बीएमसी चुनाव में अविभाजित शिवसेना ने इस लोकसभा क्षेत्र के 15 वार्डों पर कब्जा किया था, जो इस बार भी लगभग बरकरार रहा। भाजपा ने यहां 26 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से केवल 16 ही जीत सके। 2017 में जहां भाजपा के पास 20 वार्ड थे, वह संख्या घटकर 16 रह गई है।
लेकिन पाला बदलने वालों को जनता ने नकारा
बीजेपी के पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा वार्ड 43 में एनसीपी (शरद गुट) के अजित रावराणे से हार गए, जबकि चार बार की नगरसेवक उज्ज्वला मोडक मनसे की विद्या कांगने से पराजित हुईं।
स्थानीय कार्यकर्ताओं का आरोप है कि चुनाव प्रभारी कार्यालयों तक सीमित रहे और जमीनी स्तर पर सक्रियता नहीं दिखाई दी। कांग्रेस ने भी इस क्षेत्र में वापसी करते हुए वार्ड 61 से दिव्या सिंह और वार्ड 66 से हैदर मेहर मोहसीन को विजयी बनाया।
