Ajit Pawar Death: बारामती विमान हादसे की CID जांच शुरू, केंद्रीय एजेंसियां भी हुईं सक्रिय

CID Investigation: बारामती विमान हादसे के बाद CID और केंद्रीय एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है, जबकि ब्लैक बॉक्स कब्जे में लेकर दुर्घटना के कारणों की गहन पड़ताल की जा रही है।
Baramati plane crash
Ajit Pawar plane accident (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Baramati Plane Crash: बारामती हवाई अड्डे के पास हुए भीषण विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के दुर्भाग्यपूर्ण निधन से पूरे राज्य में शोक की लहर फैल गई है। इस हादसे को लेकर उठ रहे सवालों और अटकलों के बीच राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मामले की जांच राज्य अपराध जांच विभाग (CID) को सौंप दी है। वहीं, केंद्र सरकार की एजेंसियां भी इस हादसे की जांच में सक्रिय हो गई हैं।

बुधवार (28 जनवरी) सुबह 8 बजकर 46 मिनट पर वीएसआर वेंचर प्राइवेट लिमिटेड का लियरजेट-45 एक्सआर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में अजीत पवार सहित पायलट, सह-पायलट, केबिन अटेंडेंट और सुरक्षा गार्ड समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद से तकनीकी खामी, मानवीय त्रुटि और साजिश समेत विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हो रही है।

ब्लैक बॉक्स कब्जे में, तकनीकी जांच तेज

बारामती विमान हादसे के बाद विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की तीन सदस्यीय टीम ने घटनास्थल से विमान का ब्लैक बॉक्स अपने कब्जे में ले लिया है। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी रिकॉर्ड, ऑपरेशनल डाटा और घटनास्थल से जुड़े सभी तथ्यों की गहन जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके बाद मंत्रालय ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि सभी संबंधित जांच एजेंसियों को तुरंत सक्रिय कर दिया गया है और जांच को पारदर्शी, गहन और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने भी 28 जनवरी को ही प्रारंभिक जांच शुरू कर दी थी।

हवाई अड्डे की सुविधाओं पर उठे सवाल

शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बारामती हवाई अड्डे पर रडार और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) जैसी बुनियादी सुविधाओं की अनुपस्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस हवाई अड्डे से शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता और अडानी समूह जैसे बड़े उद्योगपति यात्रा करते हों, वहां आवश्यक सुरक्षा और तकनीकी सुविधाओं की कमी के लिए डीजीसीए जिम्मेदार है।

विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस हादसे की विस्तृत और निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि जनता के मन में उठ रहे संदेहों का समाधान हो सके। केंद्र और राज्य स्तर पर चल रही समानांतर जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह हादसा तकनीकी खराबी, पायलट की त्रुटि या किसी अन्य कारण से हुआ।

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