उद्धव ठाकरे व देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
Bal Thackeray Memorial Trust News: महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को एक अधिसूचना जारी कर बालासाहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक लोक न्यास का पुनर्गठन किया है। इस न्यास का उद्देश्य शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे के मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क महापौर बंगला स्थल पर बनने वाले स्मारक के निर्माण की देखरेख करना है। शिवसेना प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
महाराष्ट्र सरकार ने बालासाहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक लोक न्यास का पुनर्गठन करते हुए शिवसेना प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी शासकीय आदेश (जीआर) के अनुसार, सरकार ने उद्धव ठाकरे और चार अन्य लोगों को न्यास में नियुक्त किया है।
पूर्व मंत्री सुभाष देसाई को न्यास का सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं, उद्धव ठाकरे के बेटे, विधायक एवं पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे को सदस्य बनाया गया है।
इन नियुक्तियों में विधायक पराग अलवानी और पूर्व विधायक शिशिर शिंदे भी सदस्य के रूप में शामिल हैं। यह न्यास मुंबई के दादर इलाके में शिवाजी पार्क स्थित महापौर बंगला स्थल पर बन रहे बाल ठाकरे के स्मारक के निर्माण की देखरेख करता है।
सरकार द्वारा किए गए इस पुनर्गठन में सदस्यों के कार्यकाल की अवधि भी तय की गई है। उद्धव ठाकरे, सुभाष देसाई और आदित्य ठाकरे का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा। जबकि, न्यास के सदस्य पराग अलवानी और शिशिर शिंदे तीन वर्ष तक कार्य करेंगे।
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इन नियुक्त सदस्यों के अलावा, न्यास में पांच पदेन सदस्य भी शामिल होंगे। साथ ही, सामान्य निकाय से निर्वाचित होने वाले सदस्यों के लिए दो सीटें आरक्षित होंगी।
बालासाहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक लोक न्यास की स्थापना मूल रूप से 27 सितंबर 2016 को एक शासकीय आदेश (जीआर) के माध्यम से की गई थी। स्थापना के समय उद्धव ठाकरे ही इसके अध्यक्ष थे। हालांकि, न्यास के सदस्यों का प्रारंभिक तीन साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई नियुक्तियों की आवश्यकता पड़ने पर, उन्होंने 25 नवंबर 2019 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
बाद में, आदित्य ठाकरे को न्यास का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। अध्यक्ष के रूप में आदित्य ठाकरे समेत न्यास के सदस्यों (पदेन सदस्यों को छोड़कर) का पांच साल का कार्यकाल 11 मार्च 2025 को समाप्त हो गया था। यह वर्तमान पुनर्गठन उसी कार्यकाल की समाप्ति के बाद किया गया है।