
भाजपा नेता आशीष शेलार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Ashish Shelar Exclusive Interviews: मराठी भाषा, मराठी अस्मिता और मराठी भाषी लोगों के अस्तित्व की लड़ाई इस हद तक पहुंच जाएगी कभी आपने सोचा था ?
मराठियों की कोई लड़ाई नहीं है। मराठी लोग सुरक्षित हैं, रहेंगे और रहना ही चाहिए। इसके लिए हम काम कर रहे हैं। इसलिए मराठी लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम देवेंद्र, महायुति और विकास के साथ हैं। मराठियों की भूमिका स्पष्ट है। लड़ाई सिर्फ दो राजनीतिक दलों एवं उनके नेताओं के अस्तित्व की है। इसलिए ये लोग फेक नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका दावा है कि मुंबई में हमारा ही महापौर होगा और वह मराठी होगा।
आप कहते हैं कि महापौर हिंदू-मराठी होगा। मराठी की आपकी व्याख्या क्या है?
उनके वचननामा में मराठी शब्द ही नहीं है। उसमें मराठी लोग, हिंदू, हिंदुत्व का जिक्क्र ही नहीं है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि ये मराठियों से कभी भी ईमानदार नहीं रहे। मराठी लोगों के मुद्दे पर अब इन्होंने पल्टी भी मार दी है। कल को ये कोंकण से आए माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम कासकर को भी मराठी कहकर मुंबई का महापौर बना देंगे। हमारे हिंदू मराठी की व्याख्या स्पष्ट है, मराठी के लिए कट्टर, हिंदुत्व के लिए प्रखर और विकास के लिए प्रतिबद्ध।
लेकिन हिंदी-मराठी के अलावा मुंबई की सड़क, सफाई, नाले, झुग्गी-बस्तियां, बढ़ती आबादी, ऐसे कई मुद्दे हैं।
मूल मुद्दा विकास का ही है। एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस ने लोगों को गड्ढे मुक्त सड़क देने के लिए 4 साल में सड़कों के कॉन्क्रीटीकरण का लक्ष्य रखा है। हम मुंबई के रेल यात्रियों एक्सीलेटर, ब्रिज, कोचों में आरामदायक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मेट्रो, एक्वा मेट्रो उपलब्ध कराई जा रही है। मुंबई में आधुनिक सुविधाओं से युक्त वैश्विक स्तर के विद्यालय शुरू किए जा रहे हैं। वो भी आपके साथ थे। ठीक वैसे ही जैसे 25 साल आप बीएमसी में उनके साथ थे। तो श्रेय के साथ-साथ नाकामी में भी आपकी संयुक्त हिस्सेदारी होनी चाहिए।
मूलरूप से जिम्मेदार वही होगा, जो निर्णय प्रक्रिया में शामिल होगा। आप क्या सोच रहे हैं, मैं नहीं जानता हूं। लेकिन मैं ऐसा मानता हूं कि जो निर्णय प्रक्रिया का प्रमुख होता है उसे ही जिम्मेदारी लेनी चाहिए। अर्थात महापौर, स्थाई समिति के अध्यक्ष स्थापत्य समिति आदि। दूसरी बात यह है कि भले ही हम कुछ साल उनके साथ थे लेकिन उस दौरान भी हमने कई गलत निर्णयों का विरोध किया था।
बीएमसी में भ्रष्टाचार है उसमें नेता और कॉन्ट्रैक्टरों का नेक्सेस जिम्मेदार है, क्या वो नेक्सेस आज भी है?
सौ प्रतिशत उद्धव ठाकरे के राज में ठेकेदार और पॉलिटिकल लीडरशिप की सांठगांठ थी। इसका कारण भी है ना, सचिन वाझे कैसे पैदा हुआ? उसे क्या सुपारी दी गई थी। किन ठेकेदारों से वसूली करनी थी? ये सब चार्जशीट का हिस्सा है। खिचड़ी स्कैम में कौन जेल गया, कोविड काल में कफन में कमीशन किसने खाया? इन तमाम प्रकरणों की जांच चल रही है।
बीते तीन वर्षों का क्या ? ठेकेदार-पॉलिटिशियन कनेक्शन
प्रशासकीय अधिकारियों के पास जिम्मेदारी थी।
बारिश बीतने का बाद भी मुंबई की सड़कों की जैसी दुर्दशा देखने को मिल रही है।
आप भूल रहे हैं, मैने प्रारंभ में ही बताया था कि चार वर्षों में मुंबई की सड़कों के कॉन्क्रीटीकरण का लक्ष्य रखा गया है। 437 वर्ग किलोमीटर की मुंबई है। हजारों किमी लंबी सड़कें हैं। एक साल में काम नहीं हो सकता है। काम चल ही रहे हैं। हम रुके नहीं हैं।
आप जिसे विकास बता रहे हैं। उद्धव ठाकरे उसे तीन लाख करोड़ का भ्रष्टाचार कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि बेवजह सड़कें खोदी जा रही हैं।
मुंबई के हर तबके के लोग देश में सबसे ज्यादा और ईमानदारी से कर देते हैं। इसलिए उन्हें सुविधाएं मिलनी चाहिए, उद्धव ठाकरे 25 वर्षों में जो काम खुद नहीं कर पाए, वह कोई और कर रहा है तो उन्हें पेट दर्द तो होगा ही। कॉन्क्रीट की सड़कें, वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट उनके समय में होना चाहिए था, नहीं हुआ। इसलिए हताशा में फेक नैरेटिव सेट करने का प्रयास कर रहे हैं।
संस्कार और पार्टी विद ए डिफरेंस की बात करनेवाली बीजेपी की एमआईएम- कांग्रेस से युति हुई।
अक्षम्य अपराध है और इसका दुख भी है। हम कांग्रेस के साथ युति की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। एमआईएम के साथ तो सवाल ही नहीं उठता। लेकिन पार्टी छोड़नेवाले लोग उस विचारधारा को छोड़ रहे हैं, जिसके हम विरोधी हैं और वे हमारे यहां साथ आ रहे हैं, मतलब हमारी विचारधारा को स्वीकार कर रहे हैं।
ये भी पढ़ें :- Mumbai को ‘बॉम्बे’ बताने पर मचा सियासी बवाल, अन्नामलाई के बयान से भाजपा घिरी
कल यदि आप नाकाम होंगे तो नैतिक जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं।
बेशक।






