अनिल अंबानी पर ED का बड़ा एक्शन: रिलायंस पावर से जुड़े 12 ठिकानों पर छापेमारी, 2220 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

Anil Ambani ED Raid: प्रवर्तन निदेशालय ने मुंबई में अनिल अंबानी और रिलायंस पावर से जुड़ी संस्थाओं पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और बैंक धोखाधड़ी की जांच के तहत की गई है।
Anil Ambani ED Raid
कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Anil Ambani Bank of Baroda Fraud Case: भारत के प्रमुख उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार सुबह रिलायंस पावर और अनिल अंबानी से जुड़े कई कारोबारियों और संस्थाओं के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की है। सूत्रों के अनुसार, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में लगभग 10 से 12 अलग-अलग स्थानों पर एक साथ यह कार्रवाई शुरू की गई। इस अभियान को अंजाम देने के लिए ईडी की करीब 15 विशेष टीमों का गठन किया गया था, जिन्होंने सुबह-सुबह उन लोगों के पंजीकृत कार्यालयों और निजी आवासों पर तलाशी ली, जो इस पावर कंपनी से किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं।

क्या है मामला?

एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि यह हालिया छापेमारी रिलायंस पावर से जुड़े संदिग्ध फंड ट्रांसफर और जटिल वित्तीय लेन-देन की गहन जांच का हिस्सा है। हालांकि, शुक्रवार को हुई इस ताजा कार्रवाई को लेकर ईडी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। इससे पहले भी ईडी ने अनिल अंबानी के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में कार्रवाई करते हुए एजेंसी ने मुंबई के पाली हिल स्थित उनके आलीशान घर 'अबोड' (Abode) को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। इस संपत्ति की कीमत करीब 3,716.83 करोड़ रुपए बताई गई है।

कानूनी घेरे में अनिल अंबानी और सहयोगियों की भूमिका

ईडी के विशेष कार्य बल ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत यह जब्ती की है। रिपोर्ट के अनुसार, इसी संपत्ति के एक हिस्से को पूर्व में 473.17 करोड़ रुपए तक जब्त किया जा चुका था। केवल ईडी ही नहीं, बल्कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) भी इस मामले में सक्रिय है। पिछले महीने सीबीआई ने अनिल अंबानी के आवासों और आरकॉम के दफ्तरों की तलाशी ली थी। यह कार्रवाई बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर दर्ज एक नए मामले के बाद की गई है, जो आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी से संबंधित है।

2,220 करोड़ के नुकसान का आरोप

सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस द्वारा लिए गए कर्ज को फर्जी लेन-देन के जरिए संबंधित पक्षों को डायवर्ट किया गया, जिससे बैंक ऑफ बड़ौदा को 2,220 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी के खातों में हेरफेर कर इन अनियमितताओं को जानबूझकर छिपाया गया था। हालिया तलाशी अभियानों के दौरान जांच एजेंसियों ने लोन ट्रांजैक्शन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं, जो इस वित्तीय घोटाले की गुत्थी सुलझाने में अहम साबित हो सकते हैं।

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