
अमित शाह और सुनेत्रा पवार (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Sunetra Pawar Deputy CM: महाराष्ट्र में सत्ता का खेल पेचीदा होता जा रहा है। सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने से महाराष्ट्र सरकार में आने वाले समय में खींचतान बढ़ने की आशंका जाहिर की जा रही है। यह माना जा रहा है कि जिस तेजी के साथ सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने का निर्णय किया गया है।
वह इस बात का संकेत है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व महाराष्ट्र की राजनीति में अपना परोक्ष नियंत्रण चाहता है। ऐसा होने पर एक तरफ जहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए उनके राजनीतिक जीवन की एक नई अग्नि परीक्षा उत्पन्न होगी। वहीं, इस कदम से महाराष्ट्र के दूसरे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए भी आने वाले दिनों में चुनौती बढ़ने की आशंका है।
दिवंगत अजित पवार के देवेंद्र फडणवीस के साथ दोस्ताना संबंध थे। यही वजह है कि जब भी एकनाथ शिंदे ने उनके खिलाफ प्रत्यक्ष या परोक्ष कोई कदम बढ़ाने का प्रयास किया। उसे रोकने के लिए अजित ने अपनी राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल करते हुए उसे नाकामयाब कर दिया। अजित और फडणवीस के बीच की इस आपसी समझ की वजह से भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व भी फडणवीस पर उस तरह से हावी नहीं हो पाया।
जिस तरह से अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री पर केंद्रीय नेतृत्व का दबाव रहता है। लेकिन अजित की अचानक मृत्यु के बाद एक बार फिर केंद्रीय नेतृत्व की ओर से फडणवीस पर दबाव बनाने का प्रयास होने की आशंका जताई जा रही है।
यह कहा जा रहा है कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व का एक गुट सुनेत्रा पवार के माध्यम से परोक्ष रूप से महाराष्ट्र सरकार और यहां की राजनीति को अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास कर सकता है। इसकी वजह यह है कि सुनेत्रा पवार राजनीति में नई है। उनके पास उस तरह की राजनीतिक सूझबूझ फिलहाल नहीं है। जो अजित के पास थी। जिसका भाजपा केंद्रीय नेतृत्व का वह गुट लाभ लेना चाहता है, जो फडणवीस के घर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है।
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यह गुट पहले जहां शिंदे के माध्यम से राज्य की राजनीतिक शतरंज पर अपनी कूटनीतिक चाल चल रहा था। वह अब शिंदे को भी किनारे करते हुए सुनेत्रा के माध्यम से एक साथ दो निशाने लगाना चाहता है। ऐसे में यह देखना रोचक होगा की राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी के रूप में स्वयं को स्थापित करने वाले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगली चाल क्या होती है।






