
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
नागपुर: भारतीय इतिहास के रजत पटल पर 1 मई की तारीख स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। यही वह तारीख है जब देश के देश के दो ऐसे राज्य अस्तित्व में आए जिन्हें भारत का ‘ग्रोथ इंजन’ कहा जाता है। जी हां! हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र और गुजरात की। आज से 65 वर्ष पहले यानी साल 1960 में बॉम्बे प्रांत को दो भागों में विभाजित कर महाराष्ट्र और गुजरात राज्य का गठन हुआ था।
आज महाराष्ट्र 65 वर्ष का हो चुका है। इन 65 वर्षों में महाराष्ट्र ने खूब तरक्की की। जिसमें कई सियासतदानों का योगदान रहा है। महाराष्ट्र दिवस के मौके पर हम उनमें से 7 बड़े राजनेताओं से आपको रू-ब-रू करवाने के लिए उनकी उपलब्धियों के साथ हाजिर हैं। तो चलिए जानते हैं…
1960 में महाराष्ट्र के गठन के बाद यशवंतराव चव्हाण को सूबे के पहले सीएम बने। इतना ही नहीं वह बॉम्बे प्रांत के आखिरी मुख्यमंत्री भी थे। उन्हें “मॉडर्न महाराष्ट्र का आर्किटेक्ट” कहा जाता है। उन्होंने भारत के चौधरी चरण सिंह की सरकार में भारत के उप-प्रधानमंत्री के तौर पर भी कार्य किया।
महाराष्ट्र के पहले मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण (सोर्स- सोशल मीडिया)
यशवंतराव चव्हाण भारतीय राजनीति के इतिहास के इकलौते ऐसे राजनेता हैं। जिन्होंने भारत सरकार के सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले चारों मंत्रालयों (गृह, वित्त, रक्षा और विदेश) संभाला है। जिसका फायदा महाराष्ट्र को भी मिला। उन्होंने ही राज्य में कृषि, सहकारिता और औद्योगीकरण को बढ़ावा दिया।
भारतीय सियासत में ‘चाणक्य’ के नाम से मशहूर शरद पवार का भी महाराष्ट्र के विकास में अहम योगदान रहा है। एनसीपी संस्थापक पवार महाराष्ट्र की राजनीति में लगभग 5 दशक तक प्रभावशाली रहे हैं। वह कई बार मुख्यमंत्री रहे और केंद्र में रक्षा व कृषि मंत्री भी बने।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी संस्थापक शरद पवार (सोर्स- सोशल मीडिया)
महाराष्ट्र की बात हो और बाला साहेब ठाकरे का जिक्र न हो ये नामुमकिन है। जिन्हें शिवसेना के संस्थापक और मराठी अस्मिता के प्रतीक के तौर पर जाना जाता है। बाला साहेब सीधे चुनाव कभी नहीं लड़े, लेकिन उनकी सियासी पकड़ इतनी मजबूत थी कि राज्य में सरकारें उनके समर्थन से बनती और बिगड़ती थीं।
शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे (सोर्स- सोशल मीडिया)
वसंतराव नाईक महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे। वह 1963 से 1975 तक महाराष्ट्र में सत्ता की कुर्सी पर काबिज रहे। हरित क्रांति के दौर में कृषि सुधार और ग्रामीण विकास पर ज़ोर दिया। जिसके फलस्वरूप महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में विकास को गति मिली।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री वसंतराव नाईक (सोर्स- सोशल मीडिया)
विलासराव देशमुख ने दो बार महाराष्ट्र के मुखिया की जिम्मेदारी संभाली। इतना ही नहीं वह दो बार केंद्रीय मंत्री भी रहे। बॉलीवुड और राजनीति दोनों क्षेत्रों में संबंधों के लिए चर्चित रहे। उन्होंने ग्रामीण विकास और शहरीकरण पर काफी जोर दिया।
महाराष्ट्र के पूर्व सीएम विलासराव देशमुख (सोर्स- सोशल मीडिया)
देवेन्द्र फडणवीस को महाराष्ट्र में भाजपा के पहले और युवा सीएम के तौर पर जाना जाता है। वह तीसरी बार राज्य के सीएम की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, जैसे मुंबई मेट्रो, समृद्धि महामार्ग और नदियों को जोड़ने की योजनाओं को गति दी। “जलयुक्त शिवार” योजना से सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जलसंवर्धन हुआ।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस (सोर्स- सोशल मीडिया)
फडणवीस ने डिजिटलीकरण, निवेश आकर्षण और औद्योगिक कॉरिडोर पर भी ज़ोर दिया। भ्रष्टाचार विरोधी कदमों और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा दिया। शहरी विकास, स्मार्ट सिटी योजनाओं और कानून व्यवस्था सुधार में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही। उनकी नीतियों ने महाराष्ट्र को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त और आधुनिक बनाने में मदद की।
केन्द्र की बीजेपी सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के विकास में खासतौर पर सड़क और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने राज्य में हाईवे, फ्लाईओवर और एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स को तेज़ी से आगे बढ़ाया।
केन्द्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (सोर्स- सोशल मीडिया)
नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग उनकी प्रमुख पहलों में से है। जल संसाधन, सिंचाई और परिवहन क्षेत्र में भी उन्होंने ठोस प्रयास किए। गडकरी ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को जोड़ने वाले रास्तों का विस्तार कर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया।
महाराष्ट्र दिवस से संबंधित अन्य सभी ख़बरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






