कोल्हापुर में ठाकरे गुट में विद्रोह की चिंगारी, नए जिला प्रमुख से सुरवे को ऐतराज
हाल ही में ठाकरे गुट ने कोल्हापुर जिले के लिए रविकिरण इंगवले को नया जिला प्रमुख नियुक्त किया। इस नियुक्ति से पार्टी के भीतर विरोध के सुर उठने लगे।
- Written By: आंचल लोखंडे
नए जिला प्रमुख पर हर्षल सुरवे को सख्त ऐतराज (सौजन्यः सोौशल मीडिया)
कोल्हापुर: शिवसेना (ठाकरे गुट) में कोल्हापुर में गुटबाज़ी अब खुलकर सामने आ गई है। हाल ही में नियुक्त नए जिला प्रमुख रविकिरण इंगवले के नेतृत्व को वरिष्ठ नेता हर्षल सुरवे ने सरेआम ठुकरा दिया। सुरवे ने साफ कहा कि ‘हम किसी बनावटी और दिखावटी नेता को संगठन के सिर पर नहीं बैठने देंगे।’ इस तीखी टिप्पणी के बाद पार्टी में आंतरिक मतभेद और गहरे हो गए हैं।
हाल ही में ठाकरे गुट ने कोल्हापुर जिले के लिए रविकिरण इंगवले को नया जिला प्रमुख नियुक्त किया। इस नियुक्ति से पार्टी के भीतर विरोध के सुर उठने लगे। हर्षल सुरवे ने सार्वजनिक मंच से ऐलान किया कि वह इंगवले के नेतृत्व में काम नहीं करेंगे।
‘हमारी रीढ़ मजबूत’
सुरवे ने कहा “हमारी रीढ़ मजबूत है। हम नकली और दिखावटी पदाधिकारियों को संगठन पर हावी नहीं होने देंगे।” हर्षल सुरवे ने सीधे शब्दों में कहा कि वह इस फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग केवल अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए संगठन में पद हथियाना चाहते हैं। उनके मुताबिक ऐसे लोग पार्टी के मूल विचार और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का अपमान कर रहे हैं।
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कार्यकर्ताओं में नाराज़गी
कई स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी में जमीन से जुड़े लोगों की अनदेखी हो रही है। उन्होंने नेतृत्व से अपील की है कि असली कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाए, न कि केवल वफादारी दिखाने वालों को।
कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस गुटबाज़ी से पार्टी की छवि को नुकसान हो रहा है। कोल्हापुर शिवसेना (ठाकरे गुट) का मजबूत गढ़ माना जाता है। लेकिन लगातार उठते मतभेद संगठन को कमजोर कर सकते हैं। इससे स्थानीय चुनाव की रणनीति भी प्रभावित हो सकती है। विपक्षी दल इस विवाद को हथियार बना सकते हैं।
हर्षल सुरवे का ऐलान
हर्षल सुरवे ने कहा कि वह जल्द ही इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पद के लालच में नहीं हैं, बल्कि संगठन की गरिमा बचाने के लिए यह लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा “हम जनता के बीच जाकर सच बताएंगे और जरूरत पड़ी तो अलग रास्ता चुनेंगे।”
“शिवसेना (ठाकरे गुट) के लिए यह सिर्फ एक स्थानीय झगड़ा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि जमीनी कार्यकर्ताओं की आवाज़ अनसुनी की गई तो असंतोष और बगावत खुलकर सामने आएगी। नेतृत्व के लिए यह समय है संगठन को एकजुट रखने और भरोसा कायम करने का।”
