हिंदी के खिलाफ एकजुट होंगे ठाकरे बंधु, करेंगे बड़ा आंदोलन, BJP ने बताया 'नौटंकी'

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में हिंदी भाषा विवाद को लेकर शिवसेना उद्धव गुट और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना एक साथ आ गए हैं। उद्धव और राज ठाकरे 5 जुलाई को सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे।
उद्धव- राज ठाकरे (pic credit; social media)
उद्धव- राज ठाकरे (pic credit; social media)
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मुंबई: महाराष्ट्र में हिंदी भाषा के विरोध में शिवसेना उद्धव गुट और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानी कि राज ठाकरे एक साथ आ गए हैं। ठाकरे बंधु राज और उद्धव अब एक ही मंच से सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। 5 जुलाई को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी भाषा के विरोध में 5 जुलाई को आंदोलन करेंगे। लेकिन बीजेपी ने इस आंदोलन को 'नौटंकी' बताया है।

निकाय चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। पहले भाषा विवाद पर शिवसेना उद्धव गुट और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानी एमएनएस 6 और 7 जुलाई को अलग अलग रैली निकालने वाले थे, लेकिन इस विरोध को और भी ज्यादा धारदार बनाने के लिए उद्धव और राज ठाकरे दोनों 5 जुलाई को एक साथ मंच पर दिखेंगे।

उद्धव ठाकरे-राज ठाकरे के बीच बीते हफ्तों में हुई कई मुलाकातें

एक-दूसरे के राजनीतिक विरोधी माने जाने वाले राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच बीते कुछ हफ्तों में कई अनौपचारिक मुलाकातें हुई हैं। कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और मराठी अस्मिता की लड़ाई को केंद्र में रखकर एक नया गठबंधन आकार ले सकता है। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उद्धव गुट) दोनों ही राज्य में खुद को मराठी मानुष की असली आवाज मानते आए हैं। ऐसे में अगर दोनों पार्टियों का विलय या गठबंधन होता है, तो महाराष्ट्र की राजनीति में यह एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।

NCP के लिए भी चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह एकता न सिर्फ भावनात्मक रूप से ठाकरे परिवार के लिए महत्वपूर्ण होगी बल्कि चुनावी गणित में भी नया समीकरण बना सकती है। बीजेपी और महाविकास आघाड़ी दोनों के लिए यह गठबंधन एक नई चुनौती बन सकता है।

मुलाकात पर कोई बयान नहीं

हालांकि, अभी तक दोनों नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन उनकी टीमों की चुप्पी और नेताओं की मुलाकातें इस संभावित एकता की ओर इशारा कर रही हैं। यदि यह गठबंधन साकार होता है, तो यह केवल एक राजनीतिक कदम नहीं बल्कि ठाकरे परिवार की विरासत को पुनः एक सूत्र में पिरोने का प्रयास माना जाएगा।

गौरतलब है कि 5 जुलाई को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे साथ में महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा बनाने के फैसले के खिलाफ आंदोलन करेंगे। महाराष्ट्र में नगर निगम के चुनाव भी होने हैं। ऐसे में दोनों भाइयों की संभावित जोड़ी पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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