‘एक डांट और उजड़ गया घर’, जलगांव की जोशी कॉलोनी में छात्र ने की खुदकुशी, पुलिस जांच में जुटी
Jalgaon Student Suicide News: जलगांव में मां की डांट से दुखी होकर 15 वर्षीय छात्र प्रथम कटारे ने फांसी लगाकर आत्महत्या की। एमआईडीसी पुलिस मामले की जांच कर रही है।
- Written By: अनिल सिंह
Pratham Harish Katare Suicide Jalgaon (फोटो क्रेडिट-X)
Pratham Harish Katare Suicide: महाराष्ट्र के जलगांव जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां महज 15 साल के एक किशोर ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। जलगांव शहर के जोशी कॉलोनी इलाके में रहने वाले आठवीं कक्षा के छात्र प्रथम हरीश कटारे ने पढ़ाई के लिए मां द्वारा दी गई डांट से आहत होकर फांसी लगा ली।
इस दुखद हादसे ने न केवल परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक दबाव को लेकर समाज में एक गंभीर बहस छेड़ दी है।
यह घटना तब हुई जब प्रथम घर में अकेला था। छोटी सी बात पर उपजा आक्रोश और भावनात्मक तनाव एक मासूम की जान पर भारी पड़ गया।
पढ़ाई को लेकर टोका-टोकी और खौफनाक कदम
प्रथम हरीश कटारे जलगांव के स्कूल में आठवीं कक्षा का छात्र था। परिजनों के अनुसार, प्रथम का मन पढ़ाई में कम लग रहा था, जिसे लेकर उसकी मां ने उसे डांटा था। मां की यह डांट प्रथम को इतनी बुरी लगी कि उसने आत्मघाती कदम उठाने का फैसला कर लिया। जब घर के अन्य सदस्य बाहर गए हुए थे, तब प्रथम ने छत से फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। जब परिवार के लोग वापस लौटे, तो घर का दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
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अस्पताल पहुँचने से पहले ही थम गई सांसें
परिजनों ने शोर मचाकर पड़ोसियों को इकट्ठा किया और तुरंत प्रथम को फंदे से नीचे उतारकर नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे ‘मृत घोषित’ (Brought Dead) कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसकी मृत्यु हो चुकी थी। इस खबर के मिलते ही अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई। प्रथम के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है, और वे इस गम से उबर नहीं पा रहे हैं कि एक सामान्य सी डांट का ऐसा अंजाम होगा।
पुलिस की कार्रवाई और मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल
घटना की सूचना मिलते ही एमआईडीसी पुलिस थाना, जलगांव की टीम मौके पर पहुँची। पुलिस ने घटनास्थल का पंचनामा किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रथम के खिलाफ कोई अन्य समस्या नहीं थी, यह विशुद्ध रूप से भावनात्मक आवेग में उठाया गया कदम प्रतीत होता है। फिलहाल आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों को बच्चों से बात करते समय उनके मानसिक दबाव को समझने की जरूरत है।
