बसमत नगर परिषद (सोर्स: सोशल मीडिया)
Basmat Municipal Elections: हिंगोली जिले की वसमत नगरपालिका चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार) व शिवसेना (शिंदे) की महायुति के भीतर सीट बंटवारे की जंग और तेज हो रही है।
हकीकत यह है कि गत दो दिनों से हिंगोली व परभणी जिले के वरिष्ठ भाजपा नेताओं की लगातार बैठकों के सिलसिले के बावजूद अब तक कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। शहरवासियों की निगाहें इस पर टिकी हैं कि आखिर गठबंधन होगा कि नहीं या फिर केंद्र व राज्य में सत्तारूढ़ दल अलग-अलग ताल ठोकेंगे,
सूत्रों के अनुसार, राज्य में बढ़ती ताकत की दुआई देते हुए भाजपा अपनी पिछली क्षमता से अधिक सीटें मांग रही है। समझा जाता है कि अजित पवार गुट के वसमत के विधायक राजू भैया नवघरे सहमत नहीं बताए जा रहे हैं। नवघरे ने अपने गुट के अधिकार से समझौता करने से साफ इनकार करने से महायुति की बातचीत अधर में लटकी हुई है।
शिवसेना (शिंदे गुट) भी सीटों के बंटवारे में दबाव में आने के मूड में नहीं है। कलमनुरी के विधायक संतोष बांगर ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि जरूरत पड़ने पर पार्टी के प्रत्याशी खुद के बूते चुनाव मैदान में उतरेंगे। राज्य मंत्री व भाजपा नेता मेघना बोडर्डीकर की बैठक में भी स्वतंत्र रूप से लड़ने की तैयारी के संकेत मिल चुके हैं।
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ऐसे में राज्य के सत्तारूढ़ दल यदि अलग-अलग ताल ठोकते हैं, तो अचरज नहीं होगा। चुनाव आते ही विभिन्न पार्टियों के नेताओं और कार्यकर्ताओं में टिकट की होड़ शुरू हो चुकी है। टिकट न मिलने की स्थिति में कई चेहरों का दलबदल का सिलसिला तेज हो गया है।
बताया जा रहा है कि आज और कल होने वाली बैठकों में स्थिति स्पष्ट हो सकती है। राजनीतिक हलकों में बड़ा सवाल यह है कि क्या महायुति अंतिम समय तक ‘युति’ बचा पाएगी या वसमत में मुकाबला बिखरे हुए मोर्चों में बदल जाएगा।
चूंकि, नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि सोमवार, 17 नवंबर है। ऐसे में शहर के मतदाताओं की निगाहें महाविकास आघाड़ी व महायुति के गठबंधन पर टिकी हुई हैं।